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पानी-पानी हुआ असम! उफान पर नदियाँ और तबाही का मंज़र — जानिए कब सुधरेंगे हालात

Source of image: sabrangeindia.in
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  1. वर्तमान स्थिति (Current Ground Situation)
    असम में भारी मानसूनी बारिश और उफान पर बहती नदियों के कारण आई विनाशकारी बाढ़ से अब स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी है। हाल के दिनों में बारिश थमने से कई निचले इलाकों में जलस्तर कम हुआ है, लेकिन विस्थापन और तबाही का असर अब भी बहुत गहरा है।
    प्रभावित आबादी: असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, वर्तमान में 5.24 लाख से 6.5 लाख से अधिक लोग इस बाढ़ की चपेट में हैं (शुरुआती लहर में यह संख्या 7 से 10 लाख तक पहुँच गई थी)।
    जलमग्न गांव व कृषि भूमि: राज्य के 800 से अधिक गांव पूरी तरह जलमग्न हैं और 35,000 हेक्टेयर से अधिक खड़ी फसलें व कृषि भूमि पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
  2. मौतों का आंकड़ा और मानवीय क्षति (Death Toll & Casualties)
    मानसून और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं (डूबने, भूस्खलन और जलभराव) के कारण जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 68 हो चुकी है।
    सबसे अधिक मौतें ऊपरी असम के जिलों से दर्ज की गई हैं।
    सरकार द्वारा मृतकों के परिवारों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-gratia) देने की घोषणा की गई है।
    बाढ़ के तेज बहाव में कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में रेस्क्यू टीमें जुटी हुई हैं।
  3. बाढ़ की समस्या कब, क्यों और कैसे शुरू हुई?
    शुरुआत और समय: असम में बाढ़ का पहला दौर मई-जून की शुरुआत में आया था, लेकिन जुलाई के मध्य (18 से 20 जुलाई) में स्थिति अचानक भयावह हो गई।
    मुख्य कारण (Causes):
    अभूतपूर्व बारिश: पड़ोसी राज्य नागालैंड के पहाड़ी क्षेत्रों (मोकोकचुंग, मून, वोखा) और असम के ऊपरी हिस्सों में लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने नदियों को उफान पर ला दिया।
    नदियों का उफान: ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी प्रमुख सहायक नदियाँ—जैसे दिखौ (Dikhow), धनसिरी (Dhansiri), और दिशांग (Disang)—खतरे के निशान से काफी ऊपर बहने लगीं।
    तटबंधों का टूटना: कई स्थानों पर पुराने और कमजोर तटबंध (Embankments) पानी के दबाव को झेल नहीं पाए और टूट गए, जिससे तटवर्ती बस्तियों में अचानक पानी भर गया।
    नोट: शिवसागर जिले में आई इस बाढ़ को पिछले 50 वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ में से एक माना जा रहा है।
  4. सबसे ज़्यादा प्रभावित जिले (Worst-Hit Districts)
    बाढ़ का सबसे घातक असर पूर्वी और ऊपरी असम में देखा गया है:
    शिवसागर (Sivasagar): सबसे ज्यादा प्रभावित जिला, जहाँ लगभग 2.9 से 3 लाख लोग प्रभावित हुए।
    चराइदेव (Charaideo): यहाँ लगभग 1.9 लाख आबादी जलभराव और बेघर होने की त्रासदी झेल रही है।
    जोरहाट, डिब्रूगढ़, नगांव और गोलाघाट: इन जिलों में हजारों एकड़ भूमि जलमग्न है और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
  5. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीवों पर असर (Impact on Wildlife)
    बाढ़ का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि असम के प्रसिद्ध विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) पर भी भारी पड़ा है:
    राष्ट्रीय उद्यान के कई वन शिविर (Forest Camps) पानी में डूब गए, जिससे वनकर्मियों की गश्त प्रभावित हुई।
    बाढ़ के पानी से बचने के लिए एक-सींग वाले गैंडे, हाथियों के झुंड और हिरण कारबी आंगलोंग की सुरक्षित पहाड़ियों की ओर पलायन कर रहे हैं।
    जानवरों की सुरक्षा के लिए नेशनल हाईवे-715 पर गाड़ियों की गति सीमा तय कर धारा 144 लागू की गई है।
  6. राहत, बचाव एवं बुनियादी ढांचा (Relief, Rescue & Infrastructure Repair)
    बचाव अभियान: एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), भारतीय सेना, वायुसेना और स्थानीय पुलिस बल की टीमें दुर्गम और कटे हुए इलाकों में नौकाओं की मदद से लोगों को सुरक्षित निकाल रही हैं।
    राहत शिविर (Relief Camps): प्रशासन द्वारा 300 से अधिक राहत शिविर और वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में हजारों लोगों को अस्थायी आश्रय, सूखा राशन, पीने का साफ पानी और बच्चों के लिए दूध उपलब्ध कराया जा रहा है।
    बुनियादी ढांचे का नुकसान: सैकड़ों घर पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो चुके हैं। कई जगह सड़कें, बिजली के खंभे और पुल बह जाने के कारण दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से कट गया है।
  7. स्वास्थ्य संकट और भावी चुनौतियाँ (Post-Flood Health Risks)
    पानी के धीरे-धीरे उतरने के साथ ही अब राज्य के सामने बीमारियों का नया खतरा मंडरा रहा है:
    दूषित पानी से जलजनित बीमारियाँ (Water-borne diseases) जैसे हैजा, डायरिया और त्वचा रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है।
    स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमें भेजी जा रही हैं और पानी को साफ करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर व हैलोजन गोलियाँ बाँटी जा रही हैं।
  8. केंद्र व राज्य सरकार का रुख (Government Action & Rehabilitation)
    केंद्रीय सहायता: प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा से स्थिति का जायजा लिया है और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिया है।
    नुकसान का आकलन: बाढ़ से हुए कुल नुकसान और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए एक केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम (Central Team) असम पहुँच चुकी है, जो स्थिति का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट सौंपेगी।
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