हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है। फाजिल्का में ‘नशा मुक्त पंजाब’ अभियान के दौरान सैनी ने कहा कि AAP ने सत्ता में आने के बाद तीन महीने के भीतर नशा खत्म करने और युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। सैनी ने पंजाब सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब विधानसभा चुनाव में करीब तीन महीने का समय बचा है। उन्होंने पंजाब की जनता से पूछा कि राज्य में नशा कम हुआ है या बढ़ा है।
वादों पर उठाए सवाल
नायब सैनी ने कहा कि चुनाव से पहले AAP ने युवाओं से रोजगार देने और नशे की समस्या खत्म करने का वादा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन मुद्दों को लेकर सिर्फ वोट हासिल करने के लिए बातें कीं। उन्होंने कहा कि अब जनता के सामने यह सवाल है कि सरकार के दावों और जमीन पर स्थिति में कितना अंतर है। पंजाब में नशे का मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है।
‘नशा खत्म हुआ या बढ़ा?’
सैनी ने अपने संबोधन में पंजाब के लोगों से सीधा सवाल किया कि क्या राज्य में नशा खत्म हुआ है या समस्या और बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा सवाल पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने का है। उन्होंने इसे पंजाब के लोगों के सामने बड़ी चुनौती बताया। सैनी का यह बयान BJP के ‘नशा मुक्त पंजाब’ अभियान के दौरान सामने आया है, जिसके तहत राज्य में अलग-अलग स्थानों से यात्राएं निकाली जा रही हैं।
कर्ज को लेकर भी निशाना
हरियाणा के सीएम ने पंजाब पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य का कर्ज भी बढ़ा है। हालांकि, यह नायब सैनी का राजनीतिक आरोप है। पंजाब में नशे के मुद्दे पर AAP और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार सामने आ रहे हैं। AAP सरकार की ओर से ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत पुलिस कार्रवाई के साथ रोकथाम, जागरूकता और नशामुक्ति सेवाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
चुनाव से पहले तेज हुई सियासत
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ 18 सितंबर से शुरू हुई है और 30 सितंबर को जालंधर में इसके समापन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस अभियान के तहत चार यात्राएं राज्य के अलग-अलग हिस्सों से निकाली जा रही हैं। नायब सैनी ने इसी अभियान के दौरान पंजाब सरकार के नशे के खिलाफ प्रयासों और पुराने चुनावी वादों पर सवाल उठाए।









