देहरादून 3 अप्रैल 2026
GSST/ डेस्क: उत्तराखंड की प्रतिभाशाली विजुअल आर्टिस्ट सुलभा जोशी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर देश और राज्य का नाम रोशन किया है। वह विजुअल आर्ट्स के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जूरी सदस्य के रूप में चुनी जाने वाली भारत की पहली महिला कलाकार बन गई हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की बड़ी सफलता है, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय भी है।
सुलभा जोशी को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले “प्रथम एससीओ यूथ डेल्फिक गेम्स” के लिए जूरी सदस्य के रूप में चयनित किया गया है। यह चयन रूस स्थित मुख्यालय द्वारा किया गया है, जो इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित करता है। इस प्रकार के आयोजनों में जूरी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हैं और कला के स्तर को बनाए रखने में अहम योगदान देते हैं।

एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम कला, संस्कृति और रचनात्मकता को बढ़ावा देने का एक बड़ा मंच माना जाता है। इसमें सदस्य देशों के कलाकार भाग लेते हैं और अपनी-अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करते हैं। ऐसे मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी होती है, जिसे सुलभा जोशी निभाने जा रही हैं।
सुलभा जोशी का चयन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय कलाकार, खासकर महिलाएं, अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। उन्होंने अपने अब तक के कला सफर में लगातार मेहनत और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी कला में भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिक दृष्टिकोण का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है, जो वैश्विक दर्शकों को आकर्षित करता है।
अपनी इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए सुलभा जोशी ने कहा कि यह अवसर उनके लिए बहुत सम्मान की बात है। उन्होंने इसे अपने राज्य उत्तराखंड और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मंच के माध्यम से भारतीय कला और संस्कृति को दुनिया के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की पूरी कोशिश करेंगी।
यह उपलब्धि उत्तराखंड के युवाओं, खासकर कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की चाह रखने वालों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। सुलभा जोशी की सफलता यह संदेश देती है कि यदि प्रतिभा के साथ निरंतर प्रयास और समर्पण हो, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई जा सकती है।









