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एचडीएफसी बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा: “मूल्यों और कार्यप्रणाली में अंतर” बना मुख्य कारण

एचडीएफसी बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती,AI image
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नई दिल्ली, 31 मार्च 2026

देश के प्रमुख निजी बैंक HDFC Bank के पूर्व अंशकालिक चेयरमैन Atanu Chakraborty ने अपने इस्तीफे को लेकर पहली बार खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि 18 मार्च को दिया गया उनका इस्तीफा किसी एक घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि पिछले दो वर्षों से बढ़ती “असंगति” की भावना का नतीजा था।

चक्रवर्ती के अनुसार, बैंक की कार्यप्रणाली, नैतिक मूल्यों और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर उनकी सोच और संस्थान की प्राथमिकताओं के बीच लगातार अंतर बढ़ रहा था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में निर्णय अंततः व्यक्तिगत बन जाता है।

बदलावों के दौर में अहम भूमिका

करीब पांच वर्षों तक बोर्ड से जुड़े रहने के दौरान चक्रवर्ती ने बैंक के एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकाल को करीब से देखा। इस दौरान HDFC Ltd के साथ ऐतिहासिक विलय हुआ, शिक्षा ऋण कंपनी क्रेडिला का विनिवेश किया गया और सहायक कंपनियों के आईपीओ की दिशा में भी काम आगे बढ़ा।

उनके मुताबिक, इन फैसलों ने बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया और नियामकीय मानकों के अनुरूप ढाला।

दुबई ऑपरेशंस पर उठे गंभीर सवाल

चक्रवर्ती ने विशेष रूप से बैंक के दुबई संचालन से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया, जो 2018 से चर्चा में रहे हैं। इन मामलों में ग्राहक ऑनबोर्डिंग और व्यवहार से जुड़ी खामियां सामने आई थीं, जिन पर अंतरराष्ट्रीय नियामकों ने भी आपत्ति जताई थी।

जहां बैंक प्रबंधन ने इन समस्याओं को “तकनीकी” बताया, वहीं चक्रवर्ती का मानना था कि ये केवल प्रक्रियागत त्रुटियां नहीं, बल्कि कार्यसंस्कृति और आचरण से जुड़े गंभीर मुद्दे थे।

जवाबदेही में देरी पर चिंता

उन्होंने यह भी कहा कि दुबई में एटी1 बॉन्ड की गलत बिक्री के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई देर से हुई। उनके अनुसार, इस तरह की देरी यह सवाल उठाती है कि समस्याओं को समय रहते रोका क्यों नहीं गया।

“सक्रिय गवर्नेंस” पर जोर

चक्रवर्ती ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में गवर्नेंस का मतलब केवल प्रदर्शन की निगरानी नहीं, बल्कि पारदर्शिता, नैतिकता और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा भी है।
उनके मुताबिक, केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं, बल्कि पहले से जोखिम को रोकना ही असली गवर्नेंस है।

व्यक्तिगत विवाद नहीं, सोच का अंतर

इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्तिगत मतभेद या टकराव का मामला नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक के सीईओ Sashidhar Jagdishan की पुनर्नियुक्ति जैसे मुद्दे उनके कार्यकाल में चर्चा का हिस्सा नहीं थे।

बाजार पर असर और संकेत

चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक के शेयरों में गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों के बीच गवर्नेंस को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि HDFC Ltd के साथ विलय का बैंक की बैलेंस शीट पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।

निष्कर्ष

अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा केवल एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में गवर्नेंस, नैतिकता और विकास के बीच संतुलन पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनका संदेश साफ है—दीर्घकालिक भरोसा बनाए रखने के लिए संस्थानों को विकास के साथ-साथ मजबूत नैतिक ढांचा और समय पर जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।

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