नई दिल्ली। सफाई कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) आगामी 23 अगस्त 2026, रविवार को अपना 32वां स्थापना दिवस मनाएगा। नई दिल्ली स्थित मावलंकर सभागार, कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर से सफाई कर्मचारियों, सरकारी संस्थानों और विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
आयोग के अनुसार स्थापना दिवस समारोह में करीब 900 सफाई कर्मचारी हिस्सा लेंगे। इनके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सामाजिक संगठनों और सफाई कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े अन्य हितधारकों की भी मौजूदगी रहेगी।
केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल
कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथियों में शामिल होंगे। इसके अलावा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले और राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा भी समारोह में शिरकत करेंगे।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य करम सिंह करमा, आयोग के सचिव राहुल कश्यप सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
एनसीएसके के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने आगामी कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि स्थापना दिवस का उद्देश्य सफाई कर्मचारियों के सम्मान, अधिकारों और उनके बेहतर जीवन से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा करना है।
सफाई कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा पर रहेगा जोर
स्थापना दिवस कार्यक्रम में सफाई कर्मचारियों की गरिमा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी। इसके साथ ही खतरनाक परिस्थितियों में होने वाली मैनुअल सफाई और मैनुअल स्कैवेंजिंग को समाप्त करने, सफाई व्यवस्था में आधुनिक तकनीक और मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने तथा सफाई कर्मचारियों के पुनर्वास पर भी चर्चा होगी।
आयोग के मुताबिक सफाई व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए मैकेनाइज्ड सैनिटेशन को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। इसके साथ ही सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा केंद्र सरकार की ओर से संचालित कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
एनसीएसके जारी करेगा मिस्ड-कॉल सुविधा नंबर
इस स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल भी सामने आएगी। आयोग “NCSK Missed-Call Facility Number” जारी करेगा।
इस सुविधा का उद्देश्य सफाई कर्मचारियों और उनसे जुड़े अन्य लोगों को अपनी समस्याएं, शिकायतें और प्रतिनिधित्व आयोग तक पहुंचाने के लिए आसान माध्यम उपलब्ध कराना है। आयोग के अनुसार इस नंबर पर मिस्ड कॉल के माध्यम से संपर्क करने वाले लोगों की शिकायतों और समस्याओं पर आयोग की ओर से आगे संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई की दिशा में पहल की जाएगी।
इस व्यवस्था के जरिए आयोग सफाई कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं को सीधे समझने और संबंधित विभागों अथवा अधिकारियों के सामने समयबद्ध तरीके से उठाने की कोशिश करेगा।
क्या है राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की भूमिका?
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का गठन सफाई कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, उनके अधिकारों तथा कामकाजी परिस्थितियों से जुड़े मामलों पर निगरानी और सरकार को सुझाव देने के उद्देश्य से किया गया है।
आयोग केंद्र सरकार को ऐसे कार्यक्रमों और योजनाओं के संबंध में सुझाव देता है, जिनका उद्देश्य सफाई कर्मचारियों के बीच सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को कम करना तथा उन्हें बेहतर सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही आयोग सफाई कर्मचारियों और विशेष रूप से मैनुअल स्कैवेंजिंग से जुड़े लोगों के पुनर्वास के लिए लागू योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा भी करता है। किसी सफाई कर्मचारी या समुदाय से जुड़े मामले में शिकायत सामने आने पर आयोग उसकी जांच कर सकता है और संबंधित अधिकारियों अथवा केंद्र एवं राज्य सरकारों के समक्ष मामला उठा सकता है।
आयोग को ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने का अधिकार भी है, जहां सफाई कर्मचारियों के लिए बनाई गई योजनाओं, कार्यक्रमों, दिशा-निर्देशों या सरकारी निर्णयों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा हो।
कामकाजी परिस्थितियों और मजदूरी पर भी नजर
सफाई कर्मचारियों के काम की परिस्थितियां भी आयोग के दायरे में महत्वपूर्ण विषय हैं। आयोग अलग-अलग सरकारी विभागों, नगर निकायों, पंचायतों और अन्य नियोक्ताओं के अधीन काम करने वाले सफाई कर्मचारियों की स्वास्थ्य, सुरक्षा और मजदूरी से जुड़ी परिस्थितियों का अध्ययन एवं निगरानी करता है।
इन विषयों पर आयोग अपनी सिफारिशें केंद्र और राज्य सरकारों को भेज सकता है। सफाई कर्मचारियों को काम के दौरान किन परेशानियों या जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, इसका भी आयोग अध्ययन करता है और जरूरत के अनुसार सरकार को रिपोर्ट तथा सुझाव देता है।

2013 के कानून के बाद बढ़ा आयोग का दायरा
“The Prohibition of Employment as Manual Scavengers and Their Rehabilitation Act, 2013” लागू होने के बाद राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की जिम्मेदारियों और अधिकारों का दायरा भी बढ़ा।
इस कानून के तहत आयोग को इसके प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी करने, कानून के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच करने और अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजने का अधिकार है।
आयोग केंद्र और राज्य सरकारों को कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सुझाव भी देता है। यदि कानून के प्रावधानों का पालन नहीं होने की जानकारी सामने आती है तो आयोग उस मामले का स्वतः संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष कार्रवाई की मांग कर सकता है।
सीवर मौतों के मामलों की भी समीक्षा
सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े सबसे गंभीर मुद्दों में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतें भी शामिल हैं। आयोग ऐसे मामलों में मृतक सफाई कर्मचारियों के कानूनी वारिसों को मिलने वाले मुआवजे की स्थिति की समीक्षा करता है।
आयोग की ओर से विभिन्न मामलों की जांच और समीक्षा के आधार पर सफाई कर्मचारियों तथा उनके परिवारों के पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक उत्थान को लेकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को समय-समय पर सिफारिशें दी जाती हैं।
इन प्रयासों का व्यापक उद्देश्य सफाई कर्मचारियों को जोखिम भरे और अमानवीय सफाई कार्यों से मुक्त कराना, उनके जीवन और काम में सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए जरूरी सामाजिक और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना है।
स्थापना दिवस बनेगा संवाद का मंच
एनसीएसके का 32वां स्थापना दिवस ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब देश में स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के साथ-साथ सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और गरिमा पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
करीब 900 सफाई कर्मचारियों और विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होने वाला यह कार्यक्रम न केवल आयोग की अब तक की भूमिका और उपलब्धियों को सामने रखने का अवसर होगा, बल्कि सफाई कर्मचारियों की जमीनी समस्याओं को सीधे सुनने और उनके समाधान के लिए आगे की दिशा तय करने का मंच भी बनेगा।
गाँव से शहर तक की नजर से देखें तो सफाई कर्मचारी किसी भी शहर, कस्बे या गांव की स्वच्छता व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, सम्मान, उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा केवल सरकारी नीति का विषय नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और स्वस्थ समाज की जिम्मेदारी भी है।









