नई दिल्ली। 23 अगस्त
वर्षा चमोली
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) ने रविवार को कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में अपना 33वां स्थापना दिवस मनाया। आयोग की स्थापना के बाद यह पहली बार है जब स्थापना दिवस के अवसर पर देशभर के सफाई कर्मियों को केंद्र में रखते हुए इतने बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 900 से अधिक सफाई कर्मियों के साथ केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, नगर निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सामाजिक संगठनों और सफाई कर्मियों के कल्याण से जुड़े विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले, लोकसभा सांसद अनूप वाल्मीकि, NCSK के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल, आयोग के सदस्य करम सिंह कर्मा, सचिव राहुल कश्यप सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश साफ था कि देश को स्वच्छ रखने वाले सफाई कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत किए बिना विकसित भारत का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। कार्यक्रम में खतरनाक मैनुअल सफाई को पूरी तरह खत्म करने, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मशीनों और आधुनिक तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल, सफाई कर्मियों को प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने तथा उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देने पर विशेष जोर दिया गया।
सफाई कर्मी केवल सेवा प्रदाता नहीं, राष्ट्र निर्माण के भागीदार : मेघवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि NCSK का स्थापना दिवस केवल किसी संस्था की स्थापना की वर्षगांठ मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उन लाखों सफाई कर्मियों के योगदान को सम्मान देने का दिन भी है, जो हर दिन देश के शहरों, गांवों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों को साफ एवं सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। ऐसे में सफाई कर्मियों को भी वही सम्मान, समान अवसर और संवैधानिक गरिमा मिलनी चाहिए, जो देश के प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
मेघवाल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को रोजी-रोटी के लिए ऐसा काम करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए, जिसमें उसकी जान, स्वास्थ्य या सम्मान खतरे में पड़े। उन्होंने मैनुअल स्कैवेंजिंग के रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी कानून की वास्तविक सफलता केवल उसके बनाए जाने में नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन में है।
उन्होंने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में खतरनाक मानवीय प्रवेश को पूरी तरह समाप्त करने तथा मशीनों के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दिया। उनका कहना था कि सफाई कर्मियों को उचित प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। किसी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में जवाबदेही तय करने के साथ-साथ पीड़ित परिवार तक सहायता, मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा समयबद्ध तरीके से पहुंचनी चाहिए।
मेघवाल ने कहा कि जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब देश की स्वच्छता व्यवस्था भी आधुनिक, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित होनी चाहिए। जिस काम को मशीन सुरक्षित तरीके से कर सकती है, उसके लिए किसी इंसान की जिंदगी को जोखिम में डालना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने NCSK की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आयोग सफाई कर्मियों की समस्याओं को सरकार के सामने रखने, उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करने, राज्यों और स्थानीय निकायों में उनकी स्थिति का आकलन करने तथा आवश्यक सुधारों के लिए सरकार को सुझाव देने का महत्वपूर्ण काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सफाई कर्मियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा केवल केंद्र सरकार या आयोग की जिम्मेदारी नहीं है। राज्य सरकारों, नगर निकायों, नियुक्ति करने वाली संस्थाओं और समाज को भी इसमें बराबर की भूमिका निभानी होगी।
मेघवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश का लक्ष्य खतरनाक मैनुअल सफाई में शून्य प्रवेश, सीवर और सेप्टिक टैंक में शून्य मौतें, अधिकतम मशीनीकरण और हर सफाई कर्मी के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन होना चाहिए।
उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया कि कोई भी सफाई कर्मी ड्यूटी के दौरान अपनी जान न गंवाए और हर सफाई कर्मी काम के बाद सुरक्षित और सम्मान के साथ अपने घर लौटे।
सफाई कर्मियों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं : रामदास आठवले
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने सफाई कर्मियों के योगदान को देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि देश की साफ सड़कें, व्यवस्थित सीवर व्यवस्था और स्वच्छ सार्वजनिक स्थान सफाई कर्मियों की मेहनत का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय मिलना उनका अधिकार है। खतरनाक परिस्थितियों में सफाई कराने की पुरानी व्यवस्था को तकनीक से बदलना होगा और सीमित एवं बंद स्थानों में सफाई कर्मियों के प्रवेश को रोकने के लिए मशीनीकरण को प्राथमिकता देनी होगी।
आठवले ने कहा कि सफाई कर्मियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार की ओर से मशीनीकृत स्वच्छता व्यवस्था, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE) योजना का उल्लेख करते हुए इसे सुरक्षित और सम्मानजनक स्वच्छता व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत सफाई कर्मियों की पहचान और प्रोफाइलिंग, सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास और बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
आठवले ने NCSK द्वारा सफाई कर्मियों की शिकायतों की निगरानी, राज्यों में दौरे, संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा और सरकारों को दिए जा रहे सुझावों की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि अंतिम लक्ष्य यही होना चाहिए कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान किसी सफाई कर्मी की मौत न हो और किसी को भी खतरनाक तरीके से मैनुअल सफाई के लिए मजबूर न होना पड़े।
NCSK के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने बताई आयोग की भूमिका
NCSK के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने कहा कि आयोग सफाई कर्मियों की गरिमा, सुरक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल आयोग की स्थापना को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन लाखों सफाई कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त करने का भी दिन है, जिनकी मेहनत से देश के शहर, कस्बे और गांव साफ और सुरक्षित बने रहते हैं।
गिल ने कहा कि आयोग की जिम्मेदारी केवल शिकायतों का समाधान करना भर नहीं है। आयोग का बड़ा उद्देश्य सफाई कर्मियों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें सुरक्षित वातावरण में सम्मान के साथ काम करने का अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि आयोग के प्रतिनिधियों ने अलग-अलग राज्यों का दौरा कर सफाई कर्मियों से सीधे बातचीत की है। उनकी समस्याओं को समझने के साथ राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के साथ समीक्षा बैठकें की गई हैं और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोग की ओर से सिफारिशें भी दी गई हैं।
‘विकसित भारत@2047’ की चर्चा करते हुए गिल ने कहा कि देश के विकास के साथ स्वच्छता कर्मियों की कार्य परिस्थितियों में भी बदलाव जरूरी है। आधुनिक मशीनों और तकनीक का व्यापक इस्तेमाल, बेहतर प्रशिक्षण, पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और दुर्घटनाओं की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों के परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक आजीविका के अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत का सपना तभी पूरी तरह साकार होगा, जब सफाई कर्मी स्वयं सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त होंगे।
कार्यक्रम के दौरान हरदीप सिंह गिल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से सफाई कर्मियों के लिए भेजा गया बधाई संदेश भी प्रस्तुत किया। यह संदेश राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के 32 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिया गया।

1,377 मामलों में 1,223 परिवारों को मुआवजा
NCSK के सचिव राहुल कश्यप ने कार्यक्रम के दौरान सफाई कर्मियों की स्थिति और आयोग के कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए।
उन्होंने बताया कि देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुई मौतों के 1,377 रिपोर्टेड मामलों में से 1,223 मामलों में संबंधित परिवारों को निर्धारित मुआवजा उपलब्ध कराया जा चुका है। आयोग बाकी मामलों की भी निगरानी कर रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को मिलने वाली सहायता और मुआवजा सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली हर मौत केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। इसलिए ऐसे मामलों में मुआवजे के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।
कश्यप ने बताया कि आयोग को हर वर्ष 1,200 से अधिक शिकायतें प्राप्त होती हैं। आयोग इन शिकायतों को संबंधित सरकारी विभागों, नगर निकायों और अन्य संस्थानों के सामने उठाकर उनके उचित समाधान के लिए कार्रवाई करता है।
उन्होंने बताया कि 1,377 रिपोर्टेड मौत के मामलों में से 750 मामलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। बाकी मामलों में भी संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के साथ आयोग स्तर पर कार्रवाई की जा रही है, ताकि जहां कानून के अनुसार आवश्यक हो, वहां एफआईआर दर्ज हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके।
सफाई कर्मियों के लिए जारी हुआ NCSK मिस्ड-कॉल नंबर
कार्यक्रम में सफाई कर्मियों और अन्य हितधारकों की शिकायतों तथा समस्याओं को आयोग तक पहुंचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल की गई।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने NCSK मिस्ड-कॉल सुविधा नंबर जारी किया। इसका उद्देश्य यह है कि सफाई कर्मी और अन्य संबंधित लोग आयोग तक अपनी शिकायत, समस्या या प्रतिनिधित्व पहुंचा सकें और आयोग संबंधित मामलों को आगे कार्रवाई के लिए उठा सके।
इस सुविधा के जरिए प्राप्त मामलों को आयोग द्वारा संबंधित स्तर पर फॉलोअप कर समयबद्ध समाधान की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

250 सफाई कर्मियों का सम्मान
स्थापना दिवस कार्यक्रम में सफाई के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले सफाई कर्मियों को प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही दिल्ली नगर निगम के 250 सफाई कर्मियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह का उद्देश्य उन सफाई कर्मियों के योगदान को सार्वजनिक रूप से पहचान देना था, जो रोजाना कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने में योगदान देते हैं।
कार्यक्रम में NCSK का वार्षिक कैलेंडर-2026 भी जारी किया गया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, रामदास आठवले, हरदीप सिंह गिल, करम सिंह कर्मा, सचिव राहुल कश्यप और अन्य गणमान्य लोगों ने कैलेंडर का विमोचन किया।
करम सिंह कर्मा ने कहा—सफाई कर्मी केवल कर्मचारी नहीं, परिवार की उम्मीद हैं
NCSK के सदस्य करम सिंह कर्मा ने देशभर के सफाई कर्मियों को नमन करते हुए कहा कि शहरों, कस्बों और गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और रहने योग्य बनाने में सफाई कर्मियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मी केवल एक कर्मचारी नहीं होता, बल्कि वह अपने पूरे परिवार की उम्मीद और समाज के लिए महत्वपूर्ण भागीदार होता है।
देश के अलग-अलग राज्यों में सफाई कर्मियों, उनके परिवारों, स्थानीय प्रशासन और अन्य हितधारकों के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कर्मा ने कहा कि सफाई कर्मियों की समस्याओं को जमीन पर समझना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।
उन्होंने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में आधुनिक मशीनों और तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल को दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी सफाई कर्मी को अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।
कर्मा ने कहा कि प्रत्येक सफाई कर्मी को उचित सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और सुरक्षित कार्य प्रणाली उपलब्ध कराना सभी संबंधित संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।
आयोग के सचिव ने गिनाई चुनौतियां
NCSK के सचिव राहुल कश्यप ने कहा कि कई सफाई कर्मी आज भी कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। उनके सामने कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी का अभाव, मजदूरी के भुगतान में देरी और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
उन्होंने कहा कि आयोग इन समस्याओं को लगातार संबंधित विभागों और संस्थाओं के साथ उठाता रहा है।
कश्यप के मुताबिक, वर्षों से NCSK केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, नगर निकायों और सफाई कर्मी समुदाय के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहा है। आयोग सफाई कर्मियों के अधिकारों की रक्षा, शिकायतों के समाधान और उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

2013 के कानून के बाद आयोग की जिम्मेदारियां और बढ़ीं
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को सफाई कर्मियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान से जुड़े मामलों की निगरानी और सरकार को सुझाव देने का दायित्व दिया गया है। आयोग केंद्र सरकार को सफाई कर्मियों के लिए असमानताओं को दूर करने, सुविधाओं और अवसरों में सुधार तथा सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास से जुड़े कार्यक्रमों के संबंध में सिफारिशें देता है।
आयोग सफाई कर्मियों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन का अध्ययन और मूल्यांकन भी करता है। इसके अलावा किसी विशेष शिकायत की जांच करने और जहां आवश्यक हो, अपने स्तर से मामलों का संज्ञान लेने की भूमिका भी आयोग की है।
सरकारी विभागों, नगरपालिकाओं और पंचायतों समेत विभिन्न प्रकार के नियोक्ताओं के अधीन काम करने वाले सफाई कर्मियों की कार्य परिस्थितियों, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मजदूरी की स्थिति का अध्ययन करना भी आयोग के दायरे में आता है।
2013 में मैनुअल स्कैवेंजिंग के रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास से संबंधित कानून लागू होने के बाद आयोग की जिम्मेदारियों का दायरा और विस्तृत हुआ। कानून के तहत आयोग को इसके प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी, शिकायतों की जांच, संबंधित अधिकारियों को सिफारिशें देने और केंद्र तथा राज्य सरकारों को प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में सलाह देने की जिम्मेदारी मिली।
आयोग समय-समय पर सफाई कर्मियों की समस्याओं, सीवर दुर्घटनाओं में मृत लोगों के कानूनी वारिसों को मिलने वाले मुआवजे और पुनर्वास की स्थिति की भी समीक्षा करता है। अपनी जांच और निष्कर्षों के आधार पर आयोग सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास तथा मैनुअल स्कैवेंजिंग की कुप्रथा से सफाई कर्मियों की मुक्ति के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को सुझाव देता है।
‘स्वच्छ भारत’ की असली तस्वीर सफाई कर्मियों की सुरक्षा से तय होगी
NCSK के 33वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं के संदेश का सार यही रहा कि स्वच्छता केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने तक सीमित नहीं है। स्वच्छता व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करने वाले सफाई कर्मियों की सुरक्षा और गरिमा भी उतनी ही जरूरी है।
देश में स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ-साथ सफाई कर्मियों को प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में यह संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया कि विकास का कोई भी मॉडल तब तक पूर्ण नहीं माना जा सकता, जब तक उसे जमीन पर लागू करने वाले लोगों की जिंदगी सुरक्षित और सम्मानजनक न हो।
NCSK के स्थापना दिवस पर लिया गया यह संकल्प आने वाले समय में स्वच्छता व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा तय कर सकता है—सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव जीवन को जोखिम से बाहर करना, खतरनाक मैनुअल प्रवेश को खत्म करना, मशीनीकरण को बढ़ावा देना और हर सफाई कर्मी को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन देना।
गांव से शहर तक की रिपोर्ट में इतना साफ है कि देश की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने वाले इन कर्मियों की सुरक्षा केवल सरकारी नीति का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।








