भुवनेश्वर में राष्ट्रीय कार्यशाला, केंद्रीय सचिव सुधांश पंत ने कहा, सफाई व्यवस्था सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाने के लिए पूरे सरकारी तंत्र को साथ आना होगा
दिल्ली/भुवनेश्वर, 22 अगस्त।
सैनिटेशन कार्य के दौरान होने वाली मौतों को पूरी तरह खत्म करने के उद्देश्य से शनिवार को ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित स्टेट कन्वेंशन सेंटर, लोकसेवा भवन में “मिशन जीरो—एंडिंग फेटलिटीज इन सैनिटेशन वर्क” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शहरी स्थानीय निकायों, सैनिटेशन क्षेत्र के विशेषज्ञों, तकनीकी संस्थानों, उपकरण निर्माताओं, सिविल सोसायटी संगठनों और सैनिटेशन वर्कर्स ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देश के शहरों में सैनिटेशन सेवाओं को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाना था। इसके साथ ही सफाई कार्य में मशीनों के अधिक से अधिक इस्तेमाल, आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और सैनिटेशन वर्कर्स के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मौजूद रहे। इस अवसर पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत, ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग, आवास एवं शहरी विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव उषा पाढ़ी, CPHEEO के सलाहकार वी.के. चौरसिया, WATCO के प्रबंध निदेशक देबब्रत मोहंती, NAMASTE योजना के नोडल एजेंसी NSKFDC के प्रबंध निदेशक प्रभात कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सैनिटेशन कार्य में शून्य मौत राष्ट्रीय प्राथमिकता
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने कहा कि सैनिटेशन कार्य के दौरान होने वाली मौतों को रोकना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप देश में ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें सफाई का काम सुरक्षित तरीके से हो और किसी भी कर्मचारी को अपनी जान जोखिम में डालकर काम न करना पड़े।
पंत ने सैनिटेशन व्यवस्था के लिए “Whole-of-Government Approach” यानी पूरे सरकारी तंत्र के समन्वित प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि सुरक्षित सैनिटेशन केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, नगर निकाय, तकनीकी संस्थान, मशीनरी एवं उपकरण उपलब्ध कराने वाली कंपनियां और स्थानीय समुदाय—सभी को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि सैनिटेशन सेवाएं केवल नियमित रूप से संचालित होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि इन्हें संचालित करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण, आवश्यक उपकरण और सम्मानजनक परिस्थितियां मिलें।

NAMASTE और GARIMA योजनाओं पर जोर
कार्यशाला में NAMASTE और GARIMA योजनाओं के माध्यम से सैनिटेशन वर्कर्स और उनके परिवारों के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी प्रमुखता से सामने रखा गया। इन योजनाओं का उद्देश्य सैनिटेशन कार्य में मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ-साथ कर्मचारियों की occupational safety, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी जरूरतों को मजबूत करना है।
सैनिटेशन वर्कर्स को केवल सफाई व्यवस्था का हिस्सा मानने के बजाय उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी काम करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि सुरक्षित कामकाज के साथ-साथ इन परिवारों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर भी तैयार हों।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 में शुरू किए गए Swachhata Sarthi/Waste Picker component के माध्यम से कचरा बीनने वाले लोगों को भी सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की योजनाओं के दायरे में लाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
2031 तक जारी रहेगा NAMASTE
सुधांश पंत ने बताया कि NAMASTE योजना को वर्ष 2031 तक बढ़ाया गया है। इसके पीछे उद्देश्य सैनिटेशन सेवाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करना और देशभर में सैनिटेशन वर्कर्स तथा उनके परिवारों तक कल्याणकारी उपायों की पहुंच सुनिश्चित करना है।
इस दिशा में Emergency Response Sanitation Units (ERSUs) को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन इकाइयों के माध्यम से सैनिटेशन से जुड़ी आपात परिस्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देने और सुरक्षित तरीके से काम कराने की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य केवल किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें जोखिम वाली परिस्थितियों की पहले से पहचान हो और जरूरी मशीनरी, उपकरण तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन समय पर उपलब्ध रहें।
मशीनों और आधुनिक तकनीक पर विशेष ध्यान
“मिशन जीरो” के तहत सैनिटेशन कार्य में मशीनीकरण को सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक माना जा रहा है। कार्यशाला में इस बात पर चर्चा हुई कि जहां भी संभव हो, इंसानों को सीधे जोखिम वाले सैनिटेशन कार्य में उतारने के बजाय आधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल किया जाए।
कार्यशाला के दौरान सुरक्षा उपकरणों और सैनिटेशन से जुड़ी मशीनरी की प्रदर्शनी भी लगाई गई। सचिव सुधांश पंत ने वहां मौजूद विभिन्न उपकरणों और तकनीकों का अवलोकन किया तथा निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से बातचीत की।
इन उपकरणों का उद्देश्य सैनिटेशन वर्कर्स के काम को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना भी है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जोखिम वाले स्थानों पर मानव हस्तक्षेप कम किया जा सकता है और सफाई कार्य को अधिक वैज्ञानिक तरीके से संचालित किया जा सकता है।

Waste-to-Wealth से रोजगार और उद्यमिता पर जोर
कार्यशाला में Waste-to-Wealth Self Help Groups की ओर से लगाए गए स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। इन समूहों में waste pickers और sanitation workers से जुड़े लोग शामिल हैं।
इन स्टॉल के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई कि कचरे को केवल समस्या के रूप में देखने के बजाय उसे रोजगार और उद्यमिता के अवसर में भी बदला जा सकता है। कचरा प्रबंधन, पुनर्चक्रण और उससे जुड़ी गतिविधियों के जरिए सैनिटेशन वर्कर्स और waste pickers के लिए आय के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य सैनिटेशन क्षेत्र से जुड़े लोगों को केवल सुरक्षा उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी है, ताकि वे सम्मानजनक और स्थायी आजीविका की ओर आगे बढ़ सकें।
सरकार, नगर निकाय और तकनीकी संस्थानों के बीच समन्वय जरूरी
राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्र और ओडिशा सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा विभिन्न Urban Local Bodies, CPHEEO, सैनिटेशन क्षेत्र से जुड़े संस्थानों, सिविल सोसायटी संगठनों, तकनीकी एवं उपकरण प्रदाताओं और सैनिटेशन वर्कर्स ने हिस्सा लिया।
अलग-अलग क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और सुरक्षित सैनिटेशन व्यवस्था के लिए व्यावहारिक समाधान पर चर्चा की। इस दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है।
नगर निकायों के स्तर पर पर्याप्त मशीनरी, प्रशिक्षित कर्मचारी, सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र और निगरानी व्यवस्था उपलब्ध कराने को मिशन की सफलता के लिए अहम माना गया।
खतरनाक मैनुअल सैनिटेशन प्रथाओं को खत्म करने का लक्ष्य
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि खतरनाक मैनुअल सैनिटेशन प्रथाओं को धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त किया जाए। सफाई कर्मचारियों को ऐसे काम में लगाने से बचना होगा, जहां उनके जीवन और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
इसके लिए तकनीक और मशीनीकरण के साथ-साथ संस्थागत स्तर पर बेहतर तैयारी, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों का पालन और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
“मिशन जीरो” इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है, जहां सैनिटेशन सेवाएं भी निर्बाध चलें और इन्हें संचालित करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।
सम्मान के साथ हो सैनिटेशन वर्कर्स का काम
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी रहा कि सैनिटेशन वर्कर्स केवल सफाई व्यवस्था को चलाने वाले कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि शहरों को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में उनकी अहम भूमिका है। इसलिए उनके काम को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ उन्हें सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
सरकार की ओर से NAMASTE, GARIMA और इससे जुड़े अन्य प्रयासों के जरिए सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
“मिशन जीरो” का लक्ष्य—ड्यूटी के दौरान किसी सफाईकर्मी की जान न जाए
भुवनेश्वर में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि देश में सैनिटेशन व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, मशीनरी और मजबूत संस्थागत तंत्र के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
“मिशन जीरो” का मूल उद्देश्य स्पष्ट है—सैनिटेशन कार्य के दौरान एक भी कर्मचारी की जान नहीं जानी चाहिए। इसके लिए मशीनीकरण, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, संस्थागत तैयारी और बेहतर आजीविका को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
कार्यशाला में शामिल विभिन्न पक्षों ने सुरक्षित, सम्मानजनक, तकनीक आधारित और टिकाऊ सैनिटेशन व्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। सरकार का प्रयास है कि आने वाले वर्षों में देश के शहरों में सैनिटेशन सेवाएं ऐसी व्यवस्था के तहत संचालित हों, जहां जोखिम वाले कामों में मशीनें इंसानों का स्थान लें और प्रत्येक सैनिटेशन वर्कर सुरक्षित होकर अपना काम कर सके।









