झारखंड की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गुरुवार को तीखा हमला करते हुए कहा कि वह ‘SIR’ (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया का इस्तेमाल एक “कुटिल हथियार” के रूप में कर रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश करार दिया। मुख्यमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और हर स्तर पर मजबूती से मुकाबला करने के निर्देश दिए हैं।
सीएम सोरेन ने कहा कि SIR के बहाने समाज के कमजोर वर्ग, जैसे कि गरीब, आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदाय के मताधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे और सभी जरूरी सुधार समय पर किए जाएं।
उन्होंने इस दौरान चेतावनी दी कि अगर सतर्कता नहीं बरती गई तो कई लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री सोरेन ने आगे पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बूथ से लेकर जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं को मजबूत किया जाए, ताकि किसी भी “रणनीतिक हमले” का प्रभावी जवाब दिया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, जहां लोगों को ऐसी प्रक्रियाओं की जानकारी कम होती है।
सोरेन ने फिर भाजपा की नीतियों और नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतरें।
आगामी चुनावों को देखते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) भी अपनी रणनीति को धार दे रहा है। पार्टी स्तर पर लगातार बैठकों और मंथन के जरिए संगठन को मजबूत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि SIR को लेकर उठे इस विवाद से राज्य में चुनावी माहौल और अधिक गरमा सकता है।









