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दिल्ली में बस के अंदर महिला से सामूहिक बलात्कार, जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले खुलासे

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एक बार फिर दिल्ली की सड़कें और रात का सन्नाटा सुर्खियों में है। 11 मई 2026 की रात उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में हुई एक घटना ने महिलाओं के अंदर डर पैदा कर दिया है। आरोप है कि एक 30 वर्षीय महिला के साथ चलती निजी बस में ड्राइवर और कंडक्टर ने सामूहिक बलात्कार किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं।

पूरा मामला क्या है?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 11 मई 2026 को रात करीब 11 बजे महिला ई-रिक्शा से उतरने के बाद सरस्वती विहार के बी-ब्लॉक बस स्टैंड के पास खड़ी थी। महिला ने खड़ी एक निजी स्लीपर बस के प्रवेश द्वार पर खड़े एक व्यक्ति से समय पूछा। महिला का आरोप है कि इस दौरान बस के कंडक्टर और ड्राइवर ने जबरदस्ती उसे बस के अंदर खींच लिया और बारी बारी से बलात्कार किया। बस के दरवाजे अंदर से बंद थे, शीशों पर पर्दे लगे थे जिसकी वजह से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। इसके बाद वाहन नांगलोई की ओर चल पड़ा। महिला ने आरोप लगाया कि दोनों ने करीब 2 घंटे तक उसका बलात्कार किया। इसके बाद उसे नांगलोई के पास बस से उतार दिया गया। उसने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। उसे डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल में चिकित्सा जांच के लिए ले जाया गया।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि एक महिला ने पीसीआर कॉल करके दो पुरुषों द्वारा यौन उत्पीड़न की सूचना दी। उसकी शिकायत के आधार पर रानी बाग पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(1) (बलात्कार), 70(1) (सामूहिक बलात्कार) और 3(5) (सामान्य नीयत) के तहत एफआईआर दर्ज की।

दिल्ली पुलिस ने बस चालक (उमेश) और कंडक्टर (रामेंद्र) को गिरफ्तार कर लिया है। बिहार में पंजीकृत स्लीपर बस को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है और रूट के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की जा रही है।

दिल्ली बस में सामूहिक बलात्कार में नया मोड़

अब इस मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। बताया जा रहा है कि जिस महिला के साथ बलात्कार की घटना हुई वह पेशे से एक सेक्स वर्कर है। आरोपियों ने दावा किया कि महिला के साथ पैसों को लेकर बहस हुई थी। पुलिस के अनुसार, महिला ने पहले आरोपी उमेश के फोन का इस्तेमाल करके रामेंद्र से संपर्क किया, जो पहले ही बस से उतर चुका था और उससे पैसे मांगे। जब उसने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो उसने उसी फोन से पुलिस को फोन करके घटना की सूचना दी।

महिला ने दोनों में से किसी एक के मोबइल फ़ोन से पुलिस को कॉल किया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार महिला के 3 बच्चे हैं और पति टीबी का मरीज है।

एफआईआर में दर्ज बयान के मुताबिक महिला ने आरोप लगाते हए कहा “मैंने उनसे (बस के ड्राइवर और कंडक्टर) कहा कि मैं 3,000 रुपये लूंगी। वे मान गए। हालांकि, बस में चढ़ने के बाद उन्होंने मुझसे 1,500 रुपये में पूरी रात रुकने को कहा। मैंने मना कर दिया। लेकिन उन्होंने बस चला दी और मुझे उतरने नहीं दिया।”

महिला ने आरोप लगाया कि बस नांगलोई रेलवे रोड के पास रुकी थी। महिला ने कहा, “जिस व्यक्ति ने मुझे पैसे देने का वादा किया था, वह मुझे पिछली सीट पर ले गया और जबरदस्ती मेरे साथ यौन संबंध बनाए। फिर उसने एक और आदमी को बुलाया और उसने भी मेरे साथ जबरदस्ती की। इसके बाद मुझे बस से उतार दिया।”

सेक्स वर्कर से बलात्कार भी अपराध

पुरुषों द्वारा ऐसा सोच लिया जाता है कि महिला यदि सेक्स वर्कर है तो उसे पैसे देकर जोर जबरदस्ती की जा सकती है। लेकिन आपको बता दें कि महिला की सहमति के बिना उससे जोर जबरदस्ती की जाए तो वो बलात्कार की श्रेणी में आता है। सेक्स वर्कर है इसका मतलब ये नहीं होता कि महिला से मन मुताबिक जोर जबरदस्ती की जाए। यह भी एक तरह से अपराध माना जाता है।
भारतीय कानून के अनुसार सेक्स वर्कर को भी समान संवैधानिक और कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।यह अपराध मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता (BNS) / पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की बलात्कार संबंधी धाराओं के अंतर्गत आता है।

भारतीय कानून के अनुसार सेक्स वर्कर को भी समान संवैधानिक और कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।यह अपराध मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता (BNS) / पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की बलात्कार संबंधी धाराओं के अंतर्गत आता है।

  • पहले यह मामला IPC की धारा 375 और 376 के तहत दर्ज होता था।
  • अब नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) में यह प्रावधान बलात्कार से संबंधित धाराओं में शामिल है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में एक मामले की सुनवाई के दौरान भी स्पष्ट कहा है कि सेक्स वर्कर होने का मतलब यह नहीं है कि किसी महिला की सहमति का अधिकार खत्म हो जाता है। बिना सहमति बनाया गया संबंध बलात्कार ही माना जाएगा।

हालाँकि दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना के पीछे पुलिस सच का पता लगाने में जुटी हुई है। 

निर्भया कांड की यादें ताजा

इस घटना ने 2012 में हुए बस में सामूहिक बलात्कार की यादें ताजा कर दी। जहां दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 23 वर्षीय मेडिकल छात्रा के साथ बेहरमी से सामूहिक बलात्कार को अंजाम दिया गया। इस घटना से देशभर में लोग सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शनों करने लगे थे और कानूनी सुधार की मांग कर रहे थे। इसके बावजूद कोई सुधार देखने को नहीं मिला।

दिल्ली में बढ़ते बलात्कार और महिलाओं के खिलाफ हिंसा में दिल्ली नंबर वन पर है। यह एनसीआरबी के 2024 के आंकड़ों से पता चलता है। 19 महानगरों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सबसे अधिक संख्या दिल्ली में दर्ज की गई और बलात्कार के मामलों में भी दिल्ली राष्ट्रीय आंकड़ों में सबसे ऊपर है।

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