नई दिल्ली, 19 जुलाई।
GSST/ डेस्क: देश में स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र (NAMASTE) योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। योजना के माध्यम से सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक मैनुअल सफाई को समाप्त कर मशीनों के जरिए सुरक्षित सफाई व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके साथ ही स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित इस योजना का उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों के जीवन और कार्य परिस्थितियों में व्यापक सुधार लाना है। सरकार का मानना है कि जो लोग देश की स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उन्हें सुरक्षित कार्य वातावरण, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि नामस्ते (NAMASTE) योजना सरकार की इस अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है कि प्रत्येक स्वच्छता कर्मी को गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के साथ कार्य करने का अवसर मिले। यह योजना ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के संकल्प के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, मशीनों के उपयोग, स्वास्थ्य सुरक्षा और कौशल विकास के जरिए स्वच्छता कार्य को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य स्वच्छता कार्य के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों को पूरी तरह समाप्त करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल मशीनों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता कर्मियों और उनके परिवारों के समग्र विकास पर भी ध्यान दे रही है। इसके लिए स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि स्वच्छता कर्मी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
योजना के तहत स्वच्छता कर्मियों की पहचान कर उनका सत्यापन किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE), स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान भारत योजना का लाभ, नियमित स्वास्थ्य जांच, कार्यस्थल सुरक्षा प्रशिक्षण, आधुनिक मशीनों के संचालन का प्रशिक्षण तथा स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा आपातकालीन स्वच्छता प्रतिक्रिया इकाइयों (Emergency Response Sanitation Units-ERSU) को अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित ढंग से कार्य किया जा सके।
सरकार द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अब तक 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों तथा 2,81,117 कचरा बीनने वाले श्रमिकों का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 87,037 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों तथा 1,84,118 कचरा बीनने वाले श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) उपलब्ध कराए गए हैं।
इसी प्रकार 76,845 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों और 1,04,729 कचरा बीनने वाले श्रमिकों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे उन्हें समय पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके। वहीं देशभर में 753 आपातकालीन स्वच्छता प्रतिक्रिया इकाइयों (ERSU) को आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस किया गया है, ताकि जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में भी सुरक्षित तरीके से सफाई कार्य किया जा सके।
सरकार का कहना है कि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, नगर निकायों और विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों के सहयोग से योजना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देशभर में यंत्रीकृत स्वच्छता व्यवस्था को बढ़ावा देना, खतरनाक मैनुअल सफाई की प्रथा को समाप्त करना और स्वच्छता कर्मियों के सामाजिक एवं आर्थिक जीवन स्तर में सुधार लाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई पूरी तरह मशीनों के माध्यम से की जा सकेगी। इससे न केवल स्वच्छता कर्मियों की जान जोखिम में पड़ने की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित कार्य वातावरण भी मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से स्वच्छता क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, प्रत्येक स्वच्छता कर्मी को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना तथा ‘स्वच्छ भारत’ के साथ-साथ सुरक्षित और समावेशी भारत के निर्माण को गति देना है








