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भारत–रूस स्मार्ट सिटीज़ साझेदारी से स्मार्ट शहरी भविष्य को नई दिशा: III स्मार्ट सिटीज़ फ़ोरम, नई दिल्ली में मंथन

भारत–रूस स्मार्ट सिटीज़ साझेदारी
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 भारत–रूस स्मार्ट सिटीज़ साझेदारी, सतत शहरी विकास और तकनीकी सहयोग पर गहन चर्चा नई दिल्ली में आयोजित III स्मार्ट सिटीज़ फ़ोरम

नई दिल्ली, 24 मार्च 2026

आज The Oberoi, New Delhi में आयोजित III स्मार्ट सिटीज़ फ़ोरम में नीति-निर्माताओं, शहरी विकास विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों ने सतत, समावेशी और तकनीक-आधारित शहरी विकास के भविष्य पर व्यापक चर्चा की। तेजी से बदलते वैश्विक डिजिटल परिदृश्य के बीच इस मंच ने शहरों की भूमिका को नवाचार, निवेश और आर्थिक प्रगति के प्रमुख केंद्र के रूप में रेखांकित किया। साथ ही, इस आयोजन ने India और Russian Federation के बीच रणनीतिक सहयोग को भी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिए।

फ़ोरम में कई प्रमुख वक्ताओं ने भाग लिया, जिनमें Ram Chander Jangra (राज्यसभा सांसद), Denis Alipov (भारत में रूस के राजदूत), भारत और मॉस्को के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा वैश्विक उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल थे। सत्र का संचालन Alexey Bondaruk, प्रमुख, Moscow Center for International Cooperation ने किया।

कार्यक्रम के दौरान Rajeev Jain, पूर्व महानिदेशक, Press Information Bureau तथा पूर्व डीजी, Ministry of Housing and Urban Affairs, ने भारत के Smart Cities Mission के प्रभाव और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

नई दिल्ली में आयोजित III स्मार्ट सिटीज़ फ़ोरम में भारत–रूस स्मार्ट सिटीज़ साझेदारी

उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटीज़ मिशन केवल भौतिक अवसंरचना विकसित करने की परियोजना नहीं है, बल्कि यह नागरिकों में विश्वास, आकांक्षा और आधुनिक जीवन की संभावना को साकार करने का अभियान है। उनके अनुसार, स्मार्ट शहरों का उद्देश्य सिर्फ तकनीक या सड़कों का निर्माण नहीं, बल्कि लोगों की सोच में परिवर्तन लाना और यह भरोसा पैदा करना है कि भारत में भी विश्वस्तरीय शहरी जीवन संभव है।

अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने इस मिशन के तहत क्षेत्र-आधारित विकास और पैन-सिटी समाधानों का संतुलित मॉडल अपनाया, जिससे सीमित संसाधनों में भी अधिकतम प्रभाव उत्पन्न किया जा सका। इस रणनीति के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में ठोस और दिखाई देने वाले बदलाव संभव हुए।

उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश के 100 स्मार्ट शहरों में 8,000 से अधिक परियोजनाएँ स्वीकृत की गईं, जिनमें से 7,500 से अधिक परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, जो लगभग 94 प्रतिशत क्रियान्वयन को दर्शाता है। इन परियोजनाओं पर ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है। साथ ही, सभी स्मार्ट शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं, जो शहरी सेवाओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने विभिन्न शहरों के उदाहरण देते हुए बताया कि Indore में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन प्रणाली ने स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर व्यवहार परिवर्तन को प्रेरित किया है। Visakhapatnam में स्मार्ट अवसंरचना और आपदा प्रबंधन उपायों के कारण शहर एक सुरक्षित और पर्यटन के लिए आकर्षक तटीय केंद्र के रूप में उभरा है। Jammu and Kashmir के शहरों में स्मार्ट परियोजनाओं ने पर्यटन को बढ़ावा देने, सार्वजनिक स्थलों को बेहतर बनाने और सामान्य जीवन में विश्वास बहाल करने में योगदान दिया है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के शहरों — Shillong, Agartala और Aizawl — में स्मार्ट मोबिलिटी और डिजिटल प्रशासनिक प्रणालियों के माध्यम से भौगोलिक चुनौतियों को कम किया गया है। वहीं Udaipur में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को आधुनिक शहरी नियोजन के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा गया है।

उन्होंने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की उपयोगिता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि ये प्रणाली रियल-टाइम निगरानी, डेटा आधारित निर्णय और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है। कोविड-19 महामारी के दौरान इन केंद्रों ने स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय, संसाधनों के प्रबंधन और नागरिक सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्री जैन ने कहा कि भारत में शहरी परिवर्तन अब सरकार से आगे बढ़कर नागरिकों द्वारा प्रेरित प्रक्रिया बन चुका है। जब लोगों को बेहतर सुविधाएँ मिलती हैं, तो उनकी अपेक्षाएँ बढ़ती हैं और यही अपेक्षाएँ प्रशासनिक सुधारों और नीतिगत बदलावों को गति देती हैं।

भविष्य की दिशा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगले चरण में स्मार्ट समाधानों का पूरे शहर में विस्तार, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन, शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता में वृद्धि और नागरिक भागीदारी को और मजबूत करना आवश्यक होगा।

अपने संबोधन के समापन में उन्होंने कहा कि भारत का शहरी परिवर्तन देश की समग्र विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह केवल स्मार्ट शहरों की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे नए भारत की कहानी है जो आकांक्षा, नवाचार और सामूहिक प्रयासों से आगे बढ़ रहा है।

फ़ोरम के दौरान स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के वित्तपोषण मॉडल, आर्थिक विकास में विश्वास की भूमिका और शहरी अवसंरचना, डिजिटल प्रणालियों तथा सतत विकास के क्षेत्र में भारत-रूस सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

III स्मार्ट सिटीज़ फ़ोरम ने भविष्य के लिए ऐसे शहरों के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया जो समावेशी, टिकाऊ, सुरक्षित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों।“दिल्ली की अन्य खबरें पढ़ें”

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