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रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिकी संसद का नया कदम: 100% टैरिफ बिल के बीच वाशिंगटन से आया बड़ा बयान, ‘मोदी और ट्रम्प सुलझा लेंगे मुद्दा’

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वॉशिंगटन / नई दिल्ली
रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद को लेकर अमेरिका और भारत के रिश्तों में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। अमेरिकी सीनेट में द्विपक्षीय समर्थन से एक नया कड़ा विधेयक पारित किया गया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वे रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच प्रमुख देशों—जिसमें भारत और चीन शामिल हैं—पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकते हैं।
अमेरिकी संसद में पारित इस कदम के बाद भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों और ऊर्जा आयात पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस बीच वाशिंगटन से भारत के लिए राहत भरा बयान भी आया है।
पीटर नवारो का बयान: ‘ट्रम्प और मोदी आपस में निकाल लेंगे हल’
वाइट हाउस के वरिष्ठ व्यापार एवं विनिर्माण सलाहकार पीटर नवारो ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद मजबूत और व्यावहारिक संबंध हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों वैश्विक नेता आपस में बातचीत करके इस जटिल मसले को सुलझा लेंगे।
नवारो ने अपने पिछले लेख का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने भारत द्वारा रूसी तेल खरीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसके व्यापार पर सवाल उठाए थे, तब भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने उन पर काफी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि “अमेरिका में समस्याओं का समाधान ऑनलाइन बहस से नहीं, बल्कि नेताओं की सीधी मेज वार्ता से होता है”।
क्या है 100% टैरिफ वाला लिंडसे ग्राहम बिल?
अमेरिका की सीनेट में 86-11 के भारी बहुमत से पारित हुआ ‘लिंडसे ग्राहम बिल’ (सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026) का मुख्य उद्देश्य रूस के आर्थिक स्रोतों पर नकेल कसना है।
मुख्य बिंदु: यह विधेयक अमेरिकी प्रशासन को शक्ति देता है कि वह रूस से रियायती दरों पर ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों पर शत-प्रतिशत सीमा शुल्क थोप सके।
अमेरिकी तर्क: अमेरिका का मानना है कि रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने से मास्को की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता है और उसके सैन्य अभियानों को वित्तीय बल प्राप्त होता है।
भारत का रुख: ‘राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च’
दूसरी तरफ, भारत सरकार ने लगातार यह रुख कायम रखा है कि उसका तेल आयात पूरी तरह से राष्ट्रीय हित, बाजार की मांग और देश की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा से प्रेरित है। भारतीय विदेश मंत्रालय और विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून या प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं किया है।
वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सस्ता कच्चा तेल खरीदना भारत में महंगाई को नियंत्रित रखने और रिफाइनिंग सेक्टर को मजबूती देने में मददगार साबित हुआ है। ऐसे में 100 फीसदी टैरिफ का खतरा भारत की विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
ट्रम्प सलाहकार पीटर नवारो का भारत-रूस तेल खरीद और टैरिफ विवाद पर बयान
यह वीडियो अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित टैरिफ बढ़ाने के नए कदमों और इस पर राष्ट्रपति ट्रम्प के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की विस्तृत प्रतिक्रिया को दर्शाता है।