मुंबई:
भारत में जब भी विविधता में एकता और राष्ट्रीय अखंडता की बात होती है, तो एक ऐसा गीत हर भारतीय के दिल में अपने आप गूंजने लगता है, जिसने अपनी सुरीली धुनों से पूरे देश को एक सूत्र में पिरो दिया था। 15 अगस्त 1988 यानी आज से ठीक 38 साल पहले स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर दूरदर्शन के पर्दे पर एक ऐसा वीडियो प्रसारित हुआ, जिसने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में नया इतिहास रच दिया। हम बात कर रहे हैं कालजयी सांस्कृतिक राष्ट्रगीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ की।
सरकार की पहल पर रचा गया था एकता का मंत्र
80 के दशक के उत्तरार्ध में देश में क्षेत्रीय, भाषाई और सांस्कृतिक विविधताओं को सम्मान देते हुए एक ऐसा माहौल बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी, जो देशवासियों में राष्ट्रीय गौरव और एकजुटता का भाव जगा सके। इसी सोच के तहत तत्कालीन केंद्र सरकार और दूरदर्शन के संयुक्त प्रयास से इस आइकॉनिक प्रोजेक्ट की नींव रखी गई।
इस गीत के बोल इतने सरल और गहरे थे कि हर भाषा का व्यक्ति इसमें खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता था। इसमें हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, मराठी, उड़िया, असमिया और कश्मीरी समेत देश की 13 प्रमुख भाषाओं का बेहद खूबसूरती से समावेश किया गया था।
सुरों और कला के दिग्गजों का हुआ था संगम
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ की सबसे बड़ी खासियत इसका अप्रतिम संगीत और इसमें शामिल नामचीन हस्तियां थीं। प्रसिद्ध संगीतकार अशोक पटकी की धुन और पीयूष पांडे के लिखे शब्दों ने ऐसा जादू चलाया कि यह गाना घर-घर में गुनगुनाया जाने लगा।
इस वीडियो में देश की कला, साहित्य, खेल और सिनेमा जगत के सिरमौर एक साथ नजर आए थे:
शास्त्रीय संगीत एवं गायन: भारत रत्न लता मंगेशकर, पंडित भीमसेन जोशी, बालमुरलीकृष्ण और सुचित्रा मित्रा जैसी महान हस्तियों ने अपनी आवाज और मौजूदगी से इसे अमर बना दिया।
सिनेमा और खेल जगत: अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, शर्मिला टैगोर, जितेंद्र और कमल हासन जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ-साथ प्रकाश पादुकोण, पी.टी. उषा और मनसूर अली खान पटौदी जैसे महान खिलाड़ियों ने इसमें हिस्सा लिया था।
38 साल बाद भी कायम है वही जादू
दूरदर्शन पर लाल किले से प्रधानमंत्री के संबोधन के तुरंत बाद जब यह गीत पहली बार ऑन-एयर हुआ, तो इसने हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर दिए। कश्मीर से कन्याकुमारी और अटक से कटक तक, हर नागरिक ने इस वीडियो में खुद की और अपने भारत की झलक देखी।
आज डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में भी ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ का क्रेज जरा भी कम नहीं हुआ है। यह गीत केवल एक धुन नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस नींव का प्रतीक है जो यह याद दिलाती है कि हमारी अलग-अलग भाषाएं, बोलियां और पहनावे भले भिन्न हों, लेकिन अंततः हमारा सुर और हमारी आत्मा एक ही है।
जब ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ ने देश को एक धागे में पिरोया: 38 साल पुराने उस अमर देशभक्ति गीत की अनकही कहानी









