काठमांडू/नई दिल्ली:
नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई भीषण अचानक बाढ़ (Flash Flood) और भूस्खलन ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। मलबे और पानी के तेज बहाव में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 579 हो गया है, जबकि नेपाल और चीनी इलाकों को मिलाकर करीब 2,500 से अधिक लोग लापता हैं। इनमें भारत के कम से कम 320 नागरिक और भारतीय मूल के 100 से अधिक लोग शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने शुरुआती हिचकिचाहट के बाद आखिरकार विदेशी खोज एवं बचाव (Search & Rescue) टीमों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने पर सहमति व्यक्त की है।
320 भारतीय नागरिक और 100 भारतीय मूल के लोग संपर्क से बाहर
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में जानकारी दी कि आपदा के बाद से 320 भारतीय नागरिकों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 100 भारतीय मूल के लोग (विदेशी पासपोर्ट धारक) भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं तिब्बत सीमा के पास फंसे लगभग 400 भारतीय तीर्थयात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर लाने के लिए बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है।
सुरंग में फंसे प्रोजेक्ट वर्करों की तलाश, विदेशी टीमों की होगी तैनाती
नेपाल में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं, विशेषकर ‘त्रिशूली-1’ प्रोजेक्ट की सुरंगों में दर्जनों स्थानीय व भारतीय मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। शुरुआत में नेपाल ने केवल अपनी सेना और पुलिस बलों से ऑपरेशन चलाने की बात कही थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विभिन्न देशों के नागरिकों के गायब होने के बाद नेपाल सरकार ने सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों और रेस्क्यू टीमों को अनुमति दे दी है। भारत ने अपनी एनडीआरएफ (NDRF) टीमों, टनल रेस्क्यू स्पेशलिस्ट और मेडिकल दस्तों को काठमांडू भेजने का विशेष प्रस्ताव दिया है।
57.5 टन राहत सामग्री और बेली ब्रिज की मदद
भारत ने अब तक तीन अलग-अलग सैन्य विमानों के जरिए 57.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। इस राहत पैकेज में पोर्टेबल जेनरेटर, पानी साफ करने वाली मशीनें, खाद्य सामग्री, दवाएं और टेंट शामिल हैं। इसके अलावा बह चुके पुलों और टूटे रास्तों को दोबारा जोड़ने के लिए भारत ने 42 अस्थायी ‘बेली ब्रिज’ (Bailey Bridges) और उन्हें असेंबल करने वाले तकनीशियनों की टीम देने का फैसला किया है।
ताजा बाढ़ और मलबे की झील फटने की दोहरी आशंका
मौसम विभाग और सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में मलबे के कारण बनी अस्थाई झीलें हैं। जलस्तर दोबारा बढ़ने से निचले इलाकों में दूसरी बार बाढ़ आने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन बार-बार रोकना पड़ रहा है। नेपाली सुरक्षा बल के 7,000 से अधिक जवान राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटे हुए हैं।
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