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उत्तराखंड में सुरक्षित सफर की दिशा में बड़ा कदम: हर जिले में तैनात होंगे ‘सड़क सुरक्षा समन्वयक’, चालान फंड की हिस्सेदारी बढ़ाने का खाका तैयार

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देहरादून | विशेष संवाददाता
उत्तराखंड के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और राहत कार्यों को गति देने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक योजना तैयार की है। राज्य के सभी जिलों में अब समर्पित ‘रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर’ (सड़क सुरक्षा समन्वयक) नियुक्त किए जाएंगे। इसके साथ ही वित्तीय संसाधनों को मजबूती देने के लिए ‘सड़क सुरक्षा कोष’ (Road Safety Fund) में ट्रैफिक चालानों से प्राप्त होने वाली राशि का अंश बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया है।
जिलों में क्यों होगी रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर की तैनाती?
राज्य में सड़क हादसों में घायल होने वाले व्यक्तियों को तत्काल और बेहतर चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए फरवरी माह में ‘पीएम राहत योजना’ की शुरुआत की गई थी। हालांकि, उचित समन्वय और जागरूकता की कमी के कारण अब तक केवल सात पीड़ित ही इस योजना का लाभ उठाने में सफल रहे हैं।
इस अंतर को पाटने के लिए प्रत्येक जिले में रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति का फैसला लिया गया है। ये समन्वयक निम्नलिखित मुख्य भूमिकाएं निभाएंगे:
त्वरित उपचार सहायता: हादसों में गंभीर रूप से घायलों को सरकारी योजनाओं के तहत बिना किसी देरी के कैशलेस/निःशुल्क इलाज की सुविधा सुनिश्चित कराएंगे।
अंतर-विभागीय समन्वय: पुलिस, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य सेवाओं और लोक निर्माण विभाग (PWD) के बीच समन्वय सेतु के रूप में कार्य करेंगे।
हिट एंड रन मामलों में मदद: ‘हिट एंड रन’ (अज्ञात वाहन की टक्कर) के मामलों में पीड़ितों और उनके परिजनों को समय पर वित्तीय मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया को सुगम बनाएंगे।
सड़क सुरक्षा कोष में बढ़ेगी चालान राशि की हिस्सेदारी
परिवहन मुख्यालय ने सड़क सुरक्षा गतिविधियों और आधुनिक तकनीकों (जैसे इंटरसेप्टर वाहन, स्पीड कैमरे और आधुनिक एम्बुलेंस) के विस्तार के लिए सड़क सुरक्षा कोष को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की योजना बनाई है।
वर्तमान स्थिति बनाम नया प्रस्ताव: वर्तमान व्यवस्था में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कटने वाले चालान से प्राप्त राजस्व का एक निश्चित अंश ही सुरक्षा कोष में जमा होता है।
परिवहन विभाग ने चालान राशि की हिस्सेदारी (प्रतिशत) बढ़ाने का ड्राफ्ट तैयार कर शासन को स्वीकृति हेतु भेजा है। कोष मजबूत होने से जिलों में सड़क सुधार और ब्लैक स्पॉट्स के ट्रीटमेंट के लिए बजट की कमी नहीं होगी।
सड़क हादसों में कमी लाने का लक्ष्य
उत्तराखंड के भू-भाग और घुमावदार रास्तों को देखते हुए सड़क हादसों में ‘गोल्डन आवर’ (हादसे के ठीक बाद का पहला घंटा) बेहद संवेदनशील माना जाता है। परिवहन अधिकारियों का कहना है कि ग्राउंड लेवल पर कोऑर्डिनेटर की मौजूदगी से न सिर्फ राहत एवं बचाव कार्य तेज होंगे, बल्कि जिलों में ट्रैफिक अवेयरनेस अभियानों को भी नई दिशा मिलेगी।
शासन स्तर पर प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही जिलों में इन समन्वयकों की चयन प्रक्रिया और तैनाती का काम शुरू कर दिया जाएगा।