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UGC-NET के 3 पेपर रद्द होने पर भड़के राहुल गांधी: ‘गलती NTA की, सजा भुगतें छात्र’; मोदी सरकार और परीक्षा एजेंसी पर साधा सीधा निशाना

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अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी) विषय की परीक्षाएं रद्द होने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल; कहा- शिक्षा प्रणाली अब केवल शोषण की मशीन बन चुकी है।
नई दिल्ली:
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा यूजीसी-नेट (UGC-NET) जून परीक्षा के तीन महत्वपूर्ण विषयों—अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र—की परीक्षाओं को निरस्त कर दोबारा आयोजित करने के फैसले के बाद देश में नया राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और NTA के नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि परीक्षा एजेंसी की घोर लापरवाही और गड़बड़ियों का खामियाजा उन लाखों अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा केंद्रों तक पहुँचते हैं।
‘NTA गलती करती है और छात्र सजा काटते हैं’
राहुल गांधी ने NTA की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जून महीने में हुई परीक्षाओं के लगभग दो महीने बाद एजेंसी को ध्यान आता है कि प्रश्नपत्रों में भारी गड़बड़ियां थीं और पुराने सवाल दोहराए गए थे। उन्होंने लिखा, “हजारों अभ्यर्थी जिन्होंने सालों तक मेहनत की, फॉर्म भरे, फीस दी और दूर-दराज के सेंटरों पर जाकर परीक्षा दी, उन्हें अब सितंबर में दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। NTA गलती करती है, लेकिन उसकी सजा छात्र भुगत रहे हैं।”
शिक्षा प्रणाली को बताया ‘एक्सट्रैक्शन मशीन’
राहुल गांधी ने वर्तमान परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही, बल्कि छात्रों के पैसे, साल, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को निचोड़ने वाली एक ‘एक्सट्रैक्शन मशीन’ बनकर रह गई है। उन्होंने NTA से सीधा सवाल पूछा कि क्या ये प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक भी हुए थे? राहुल ने मांग की कि केवल मंत्री या अधिकारियों के बयानों से काम नहीं चलेगा, बल्कि NTA के शीर्ष नेतृत्व की सीधी जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
क्या था NTA का फैसला?
उल्लेखनीय है कि कई शिकायतों और जांच समिति की रिपोर्ट के बाद NTA ने माना कि अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के पेपरों में तथ्यात्मक, भाषाई, अनुवाद और व्याकरण से जुड़ी गंभीर त्रुटियां थीं और काफी सवाल पुराने पेपरों से जस के तस दोहरा दिए गए थे। इसके बाद इन तीनों विषयों की परीक्षा रद्द कर अब 9 और 10 सितंबर को दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
पाठकों की राय (Poll Option for Website):
UGC-NET की परीक्षाएं रद्द होने पर राहुल गांधी द्वारा सरकार और NTA पर सवाल उठाने को आप कैसे देखते हैं? नीचे अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करें:
👍 (सरकारी प्रयास): सरकार ने हमेशा युवाओं के हित को प्राथमिकता दी है और निष्पक्ष परीक्षा के लिए ही यह फैसला लिया गया है।
👎 (विपक्ष की भूमिका): राहुल गांधी ने अभ्यर्थियों की सही आवाज बनकर सरकार और व्यवस्था की नाकामियों को घेरा है।
🙏 (व्यवस्था पर सवाल): बार-बार नेशनल लेवल की परीक्षाएं रद्द होना पूरी चयन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
😮 (छात्रों का नुकसान): प्रशासनिक स्तर पर हुई NTA की बड़ी लापरवाही का पूरा खामियाजा निर्दोष छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
😠 (कड़ा आक्रोश): लाखों युवाओं के भविष्य और उनके सालों की मेहनत के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होना चाहिए।