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वर्दी छोड़ चुनी राष्ट्रवाद की राह: जंतर-मंतर के प्रदर्शनों से आहत गुजरात के कांस्टेबल ने दिया इस्तीफा, मोदी सरकार के समर्थन में उठाई आवाज

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सरकारी नौकरी का मोह त्याग कर गुजरात पुलिस के जवान रामगर मोहनगर गोसाईं ने देश विरोधी माहौल के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। जानिए क्या है पूरा मामला…
आज के समय में जहां युवा एक सुरक्षित सरकारी नौकरी पाने के लिए सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं, वहीं गुजरात से एक बेहद हैरान कर देने वाली और वैचारिक प्रतिबद्धता की अनूठी मिसाल सामने आई है। गुजरात पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे एक कांस्टेबल, रामगर मोहनगर गोसाईं ने अपनी खाकी वर्दी और पुलिस पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह चौंकाने वाला कदम दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और देश में बनाए जा रहे नकारात्मक माहौल के सख्त विरोध में उठाया है।
अभिव्यक्ति की आड़ में देश विरोधी माहौल से थे नाराज
विस्तृत जानकारी के अनुसार, रामगर मोहनगर गोसाईं पिछले काफी समय से देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर हो रहे लगातार विरोध प्रदर्शनों से आहत थे। उनका मानना है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके नाम पर जिस तरह से सरकार विरोधी और देश को बांटने वाला नैरेटिव (माहौल) तैयार किया जा रहा है, वह किसी भी सच्चे देशभक्त के लिए बर्दाश्त के बाहर है। एक पुलिसकर्मी होने के नाते उन पर कई तरह की विभागीय पाबंदियां थीं, जिसके कारण वह सार्वजनिक मंचों पर खुलकर अपनी भड़ास नहीं निकाल पा रहे थे। इसी मजबूरी को तोड़ते हुए उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और अपनी नौकरी को लात मारकर एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में राष्ट्रहित के लिए आवाज उठाने का साहसिक निर्णय लिया।
मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का किया खुला समर्थन
इस इस्तीफे के पीछे का सबसे बड़ा कारण केंद्र की वर्तमान सत्ता का समर्थन करना बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामगर गोसाईं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों, उनके कार्य करने के तरीके और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रवादी विचारधारा से गहराई से प्रभावित हैं। उनका स्पष्ट तौर पर यह संदेश है कि जो सरकार देश के समग्र विकास, कड़े सुधारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दिन-रात काम कर रही है, उसके खिलाफ बेवजह का दुष्प्रचार करना देश की प्रगति में रोड़ा अटकाने जैसा है। वह अब खुलकर इन राष्ट्रवादी ताकतों के समर्थन में काम करना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर हो रही है जमकर चर्चा
जैसे ही गुजरात पुलिस के इस जवान के इस्तीफे की खबर बाहर आई, यह सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गई। आम लोग रामगर गोसाईं के इस जज्बे की काफी तारीफ कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अपने वैचारिक मूल्यों और सरकार के समर्थन के लिए एक पक्की सरकारी नौकरी की बलि चढ़ा देना कोई मामूली बात नहीं है।
निष्कर्ष
रामगर मोहनगर गोसाईं का यह कदम उन ताकतों के लिए एक कड़ा जवाब माना जा रहा है जो देश में अस्थिरता फैलाने का प्रयास करते हैं। उनका यह इस्तीफा सिर्फ एक नौकरी छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि आज का युवा राष्ट्रहित के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। अब देखना यह होगा कि बिना वर्दी के, एक आम नागरिक के रूप में उनका यह संघर्ष आगे क्या दिशा लेता है।