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हल्द्वानी रैली विवाद: मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद ‘शुद्धिकरण’ पर छिड़ा घमासान, राहुल गांधी के हमले पर CM धामी का पलटवार

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उत्तराखंड की शांत वादियों में इन दिनों सियासी पारा चरम पर है। हल्द्वानी में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक विशाल जनसभा आयोजित की गई थी। हालांकि, कार्यक्रम के समाप्त होते ही एक नया विवाद खड़ा हो गया, जिसने पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। रैली स्थल पर हुए कथित ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है।
राहुल गांधी का तीखा हमला
मामले ने तूल तब पकड़ा जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को लेकर राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार पर जोरदार हमला बोला। राहुल गांधी ने इसे सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ करार दिया। उनका कहना था कि विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति इस प्रकार का व्यवहार भारतीय राजनीति के उच्च आदर्शों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार और सत्ताधारी दल समाज में विभाजनकारी संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पलटवार
कांग्रेस के इन गंभीर आरोपों पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत और कड़ा पलटवार किया है। धामी ने कांग्रेस के सभी दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा, “यह किसी व्यक्ति विशेष या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का शुद्धिकरण नहीं था, बल्कि रैली के दौरान लगाए गए उन नारों का शुद्धिकरण था जो सामाजिक शांति और मर्यादा के खिलाफ थे।” CM धामी के इस बयान के बाद विवाद शांत होने के बजाय एक नए मोड़ पर पहुंच गया है।
उत्तराखंड की राजनीति में गर्माया माहौल
इस घटनाक्रम ने आने वाले चुनावों से पहले प्रदेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस इसे दलित और वरिष्ठ नेताओं के अपमान से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की रणनीति बना रही है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी अपने रुख पर कायम रहते हुए कांग्रेस के आरोपों को आधारहीन बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘नारों के शुद्धिकरण’ बनाम ‘नेता के शुद्धिकरण’ की यह बहस सिर्फ हल्द्वानी तक सीमित नहीं रहने वाली। दोनों ही प्रमुख दल इस मुद्दे के जरिए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और एक-दूसरे को घेरने की पूरी कोशिश में जुट गए हैं।