Home / देश-विदेश / चमोली सुरंग हादसा: रेस्क्यू ऑपरेशन में एक और शव बरामद, मलबे के नीचे दबे 2 श्रमिकों की तलाश में जुटीं टीमें

चमोली सुरंग हादसा: रेस्क्यू ऑपरेशन में एक और शव बरामद, मलबे के नीचे दबे 2 श्रमिकों की तलाश में जुटीं टीमें

AI image created by Chat GPT
Spread the love

चमोली, उत्तराखंड:
उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुआ हादसा लगातार गंभीर होता जा रहा है। बीते 13 अगस्त को हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद से चल रहे बचाव कार्य में प्रशासन को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। शनिवार को मलबे से एक और श्रमिक का शव बरामद किया गया है, जिससे इस दुर्घटना में मृतकों की संख्या में इजाफा हो गया है। अब रेस्क्यू टीमें सुरंग के अंदर फंसे बचे हुए दो लापता श्रमिकों तक पहुंचने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं।
लगातार जारी है ‘जिंदगी’ की खोज
हादसे के बाद से ही एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से राहत और बचाव कार्य चला रही हैं। सुरंग के भीतर फैली भारी मात्रा में कीचड़, पानी और मलबा रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। भारी मशीनों और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम निरंतर जारी है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, सुरंग के अंदर की स्थिति और अधिक जटिल होती जा रही है। मौके पर तैनात रेस्क्यू टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारी प्राथमिकता उन दो श्रमिकों को सुरक्षित या उनके अवशेषों को बरामद करना है जो अभी भी लापता हैं। हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि बचाव कार्य में कोई चूक न हो और जल्द से जल्द ऑपरेशन पूरा किया जा सके।”
परिजनों का इंतजार और प्रशासन का आश्वासन
हादसे के बाद से ही सुरंग के बाहर लापता श्रमिकों के परिजन अपनी आंखें बिछाए बैठे हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उनकी उम्मीदें टूट रही हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें सांत्वना दे रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए स्थानीय अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार और मृतकों के परिवारों को हर संभव आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में चल रही बड़ी निर्माण परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि टनल के ऊपर बने प्राकृतिक नालों और कमजोर भू-भाग की जानकारी होने के बावजूद सुरक्षात्मक उपायों में की गई लापरवाही इन मौतों की मुख्य वजह है। फिलहाल, जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और परियोजना स्थल पर काम को फिलहाल रोक दिया गया है।
बचाव दल अब पूरी रात काम करने की योजना बना रहा है ताकि जल्द से जल्द लापता श्रमिकों का पता लगाया जा सके। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और स्थानीय लोग इस घटना के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।