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उत्तराखंड के चमोली में कुदरत का कहर जारी: 30 दिनों में तीसरी बड़ी प्राकृतिक आपदा, पंचम केदार कल्पेश्वर मंदिर की पहाड़ी पर भीषण भूस्खलन

AI image of Landsliding
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10 अगस्त को तमक नाले में बादल फटने और 13 अगस्त को टनल हादसे के बाद अब कल्पेश्वर धाम के ऊपर से खिसकी चट्टानें, इलाके में दहशत का माहौल।
देहरादून/चमोली:
देवभूमि उत्तराखंड का सीमांत जिला चमोली इन दिनों कुदरत के भयंकर प्रकोप से जूझ रहा है। एक महीने के भीतर सिलसिलेवार तरीके से आई तीसरी प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र में दहशत और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। ताजा मामला प्रसिद्ध पंचम केदार में शामिल कल्पेश्वर मंदिर के ठीक ऊपरी हिस्से का है, जहाँ भारी भूस्खलन होने से विशालकाय चट्टानें और मलबे का सैलाब नीचे आ गिरा। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई है।
30 दिनों में तीन बड़ी आपदाओं से थर्राया चमोली
चमोली जिले में बीते एक महीने की घटनाएँ यह बताने के लिए काफी हैं कि यहाँ पहाड़ किस कदर संवेदनशील हो चुके हैं:
10 अगस्त – तमक नाले में बादल फटना: अगस्त की शुरुआत में ही तमक नाले के पास अचानक बादल फटने से भारी तबाही हुई थी, जिससे नदी-नाले उफान पर आ गए थे और स्थानीय बुनियादी ढाँचे को बड़ा नुकसान पहुँचा था।
13 अगस्त – टीएचडीसी टनल में भूस्खलन: पहली घटना के ठीक तीन दिन बाद 13 अगस्त को टीएचडीसी (THDC) की निर्माणाधीन सुरंग (टनल) के समीप अचानक पहाड़ी दरकने से भूस्खलन हुआ था, जिससे काम में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
ताजा हादसा – कल्पेश्वर धाम पर आफत: अब पवित्र कल्पेश्वर महादेव मंदिर के ऊपरी हिस्से की पहाड़ी धंसने से एक बार फिर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। लगातार हो रहे इन हादसों से यह साफ है कि जिले का एक बड़ा हिस्सा इस समय अत्यधिक जोखिम में है।
तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की बढ़ी चिंता
पंचम केदार में से एक कल्पेश्वर धाम में भगवान शिव की जटाओं की पूजा होती है, जहाँ वर्ष भर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं। मंदिर के ठीक ऊपर हुई इस भूस्खलन की घटना ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। गनीमत यह रही कि इस दौरान कोई बड़ी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन जिस रफ्तार से पहाड़ दरक रहे हैं, उससे मंदिर परिसर के अस्तित्व और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रशासनिक अलर्ट और विशेषज्ञ की राय
लगातार हो रही इन घटनाओं को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के इन पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, कमजोर भूगर्भीय संरचना और मानवीय गतिविधियों के कारण भूस्खलन की घटनाओं में तेजी आई है।
प्रशासन ने आम जनता और तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे मौसम का मिजाज देखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएँ और नदी-नालों तथा संवेदनशील पहाड़ियों के पास जाने से बचें।