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E20 फ्यूल की गुणवत्ता पर उठे सवाल: कार निर्माताओं की गुप्त रिपोर्ट से हड़कंप, क्या खतरे में है वाहनों का इंजन?

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नई दिल्ली:
देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिए जाने के बीच ऑटोमोबाइल जगत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में ऑटो सेक्टर के आंतरिक ईमेल और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद E20 ईंधन की गुणवत्ता को लेकर बहस छिड़ गई है। देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियों—मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा—द्वारा किए गए आंतरिक परीक्षणों में ईंधन में ‘क्लोराइड’ और ‘नमी’ की भारी मात्रा पाए जाने की बात सामने आई है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही वाहन चालकों और कार कंपनियों दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
ईंधन में क्लोराइड और नमी का खतरनाक स्तर
ऑटो कंपनियों द्वारा 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पेट्रोल पंपों से 250 से अधिक sample इकट्ठा करके टेस्ट किए गए। परीक्षण के परिणामों ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
स्वीकार्य सीमा से कई गुना ज्यादा क्लोराइड: सरकार द्वारा ईंधन में अधिकतम 3 ppm (पार्ट्स पर मिलियन) क्लोराइड की सीमा तय की गई है, जबकि कुछ राज्यों (जैसे राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर) के पेट्रोल सैंपल्स में क्लोराइड का स्तर 400 से 570 ppm तक पाया गया।
इंजन के कलपुर्जों को नुकसान: विशेषज्ञों और ऑटो इंजीनियर्स के मुताबिक, ईंधन में क्लोराइड का उच्च स्तर वाहनों के ‘फ्यूल इंजेक्टर’ और इंजन पार्ट्स में तेजी से जंग (Corrosion) पैदा करता है।
समय से पहले वाहन खराब होने का खतरा: महिंद्रा के फ्लुइड टेक्नोलॉजी विंग का मानना है कि ऑर्गेनिक क्लोराइड के संपर्क में आने से वाहन का इंजन मात्र 200 किलोमीटर चलने के भीतर भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
SIAM की चिट्ठी और यू-टर्न का सच
वाहन निर्माताओं के संगठन SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने पहले सरकार को पत्र लिखकर ईंधन की गुणवत्ता में सुधार और क्लोराइड की मात्रा नियंत्रित करने की मांग की थी। हालांकि, सरकारी रुख और आंकड़ों के री-वेरिफिकेशन का हवाला देते हुए SIAM ने बाद में अपना बयान वापस ले लिया। लेकिन लीक हुए अंदरूनी ईमेल से यह साफ है कि सार्वजनिक रूप से E20 नीति का समर्थन करने के बावजूद, वाहन कंपनियां निजी तौर पर गाड़ियों के परफॉर्मेंस और माइलेज पर पड़ रहे असर को लेकर बेहद चिंतित हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियों की सफाई
दूसरी ओर, पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने ईंधन में बड़े पैमाने पर मिलावट के दावों को खारिज किया है। तेल कंपनियों का कहना है कि देशभर में 80 से अधिक डिस्टिलरी और टर्मिनलों की गहन जांच की गई है, जहां अधिकांश सैंपल्स में गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाई गई है। तेल कंपनियों के मुताबिक, कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर मिली गड़बड़ियों पर तुरंत आपूर्ति रोक दी गई है और जांच जारी है।
उपभोक्ताओं की बढ़ती मुश्किलें
देशभर में 1 अप्रैल से केवल E20 पेट्रोल की उपलब्धता अनिवार्य किए जाने के बाद से आम वाहन चालकों में असंतोष बढ़ रहा है। वाहन चालकों द्वारा माइलेज में गिरावट, इंजन में झटके लगने और स्पेयर पार्ट्स के जल्द खराब होने की शिकायतें लगातार की जा रही हैं। पुरानी गाड़ियों (जो E20 के अनुकूल नहीं बनाई गई थीं) के मालिकों के लिए यह समस्या और भी गंभीर रूप ले चुकी है।
यह स्थिति स्पष्ट करती है कि पर्यावरण संरक्षण और तेल आयात घटाने की दिशा में E20 ईंधन एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है, लेकिन जब तक इसकी रिफाइनिंग, स्टोरेज और डिलीवरी चेन में कड़े सुरक्षा मानक लागू नहीं होंगे, तब तक देश के करोड़ों वाहन चालकों के सिर पर इंजन खराब होने की तलवार लटकी रहेगी।