Samrat Choudhary journey: बिहार की कमान अब सम्राट चौधरी के हाथों में होगी। कल वे बिहार के एक मुख्यमंत्री को रूप में शपथ लेंगे। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नए मुख्यमंत्री के लिए उनका नाम घोषित कर दिया।
बिहार की राजनीति के सभी ध्रुवों की सियासत के अनुभवी सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। बाद में वे जनता दल यूनाईटेड और फिर भारतीय जनता पार्टी में पहुंचे। मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में 16 जनवरी 1968 को मुंगेर के लखनपुर गांव में जन्मे सम्राट के पिता शकुनी चौधरी बिहार के जानेमाने समाजवादी नेता थे और केंद्रीय मंत्री भी रहे। सम्राट चौधरी को राकेश कुमार भी कहा जाता है।
सम्राट चौधरी ने 1990 में राजनीति में एंट्री की। वे RJD में रहते हुए सन 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में कृषि मंत्री बने थे। सन 2005 में वे JDU में शामिल हो गए थे। 2014 में उनको शहरी विकास और आवास मंत्री बनाया गया था। वे 2015 तक इस पद को संभालते रहे। 2017 में उन्होंने अपना सियासी सफर BJP के साथ शुरू किया। तब उनको BJP का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा उनको बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
2023 के मार्च में उनको बिहार BJP का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। वे जुलाई 2024 तक इस पद पर रहे थे। सम्राट 2021 से 2022 तक पंचायती राज मंत्री पद पर रहे। अगस्त 2022 से अगस्त 2023 तक वे विधान परिषद में विपक्ष के नेता रहे। जब JDU और BJP का गठबंधन हुआ तो सम्राट चौधरी जनवरी 2024 को बिहार के उप मुख्यमंत्री बने। सन 2024 में नीतीश ने RJD से गठबंधन तोड़कर NDA में वापसी की थी।
इसके बाद 2025 में हुए चुनाव के बाद एक बार फिर सम्राट उप मुख्यमंत्री के साथ गृह मंत्री भी बने। यह पहली बार हुआ जब नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास न रखकर किसी अन्य मंत्री को दिया। उन्होंने 20 नवंबर 2025 को नीतीश के 10वें मंत्रिमंडल में उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
सम्राट चौधरी ने मई 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में कृषि मंत्री बने थे। हालांकि तब उनकी उम्र कम होने पर काफी विवाद हुआ था। इन हालातों में उनको नवंबर 1999 में मंत्री पद से हटा दिया गया था।
1968 में 16 नवंबर को बिहार के मुंगेर जिले के लखनपुर में जन्म।1990 में राजनीति में एंट्री।1999 में बिहार सरकार में कृषि मंत्री बने।नवंबर 1999 में कम उम्र होने के कारण विवाद के बाद मंत्री पद से हटाए गए।2000 में परबत्ता निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए।2010 में परबत्ता सीट से फिर से विधायक चुने गए और विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक बने।
जून 2014 में RJD छोड़कर JDU में शामिल हुए और जीतनराम मांझी की सरकार में शहरी विकास और आवास मंत्री बने।2017 में BJP में शामिल हुए और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए।2020 में विधान परिषद के सदस्य (MLC) के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए।
2021 में पंचायती राज मंत्री बनाए गए।अगस्त 2022 में बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता बने।
मार्च 2023 में BJP के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए।जनवरी 2024 में बिहार के डिप्टी CM बने।
2025 में तारापुर से विधायक चुने गए।नवंबर 2025 में नीतीश के नेतृत्व में 41वीं विधानसभा में उप मुख्यमंत्री बनाए गए।









