नई दिल्ली:
संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही भले ही पूरी हो चुकी हो, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई उनकी एक आक्रामक टिप्पणी अब उन पर भारी पड़ गई है। लोकसभा सचिवालय ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राहुल गांधी को ‘विशेषाधिकार हनन’ (Breach of Privilege) और सदन की अवमानना का नोटिस थमा दिया है। सचिवालय ने कांग्रेस नेता से इस गंभीर मसले पर 28 अगस्त 2026 तक अपना स्पष्टीकरण मांगा है।
क्या है पूरा विवाद और कैसे हुई शुरुआत?
यह पूरा सियासी बवाल संसद में हाल ही में पारित हुए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ (एंटी पेपर-लीक बिल) पर हुई चर्चा से जुड़ा है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि इस अहम बिल पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने संसदीय मर्यादाओं को लांघते हुए गृह मंत्री अमित शाह पर कई गंभीर, बेबुनियाद और व्यक्तिगत आरोप लगाए। लोकसभा के नियमों (विशेषकर नियम 353) के अनुसार, किसी भी मंत्री या सांसद पर इस तरह के सीधे आरोप लगाने से पहले अध्यक्ष को पूर्व सूचना देनी अनिवार्य होती है। लेकिन, आरोप है कि राहुल गांधी ने बिना किसी पूर्व नोटिस के असंसदीय और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
बीजेपी के इन दिग्गज सांसदों ने की थी शिकायत
राहुल गांधी के इन बयानों के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उनके खिलाफ तुरंत मोर्चा खोल दिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने 30 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक लिखित शिकायत सौंपी थी। इससे एक दिन पहले, 29 जुलाई को बीजेपी के वरिष्ठ सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने भी इसी मुद्दे को लेकर अध्यक्ष को पत्र लिखा था। दोनों नेताओं ने राहुल गांधी के आचरण को सदन की गरिमा और स्थापित परंपराओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया था और उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की थी।
28 अगस्त की डेडलाइन: आगे क्या होगा एक्शन?
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इन शिकायतों का संज्ञान लिए जाने के बाद, सचिवालय के विशेषाधिकार अनुभाग ने 14 अगस्त को राहुल गांधी को आधिकारिक नोटिस भेज दिया है। इसमें साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि वे 28 अगस्त तक अपना विस्तृत लिखित जवाब लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत करें।
संसदीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, यदि राहुल गांधी द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो इस मामले को आगे की जांच के लिए ‘विशेषाधिकार समिति’ (Privileges Committee) के पास भेज दिया जाएगा। वर्तमान में इस ताकतवर समिति की कमान बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के हाथों में है। यदि समिति राहुल गांधी को नियमों के उल्लंघन का दोषी मानती है, तो उन्हें कड़ी चेतावनी दी जा सकती है या फिर सदन की कार्यवाही से निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।
बढ़ सकती है राजनीतिक तल्खी
इस नोटिस के जारी होने के बाद देश का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। जहां सत्ताधारी दल बीजेपी इसे विपक्ष के नेता द्वारा सदन की गरिमा और संसदीय परंपराओं का घोर अपमान बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे विपक्ष की मजबूत आवाज को डराने और दबाने की सोची-समझी साजिश करार दे रही है। अब पूरे देश की नजरें 28 अगस्त पर टिकी हैं कि राहुल गांधी इस सियासी बाउंसर का जवाब किस अंदाज में देते हैं।
अमित शाह पर टिप्पणी कर बुरी तरह फंसे राहुल गांधी: लोकसभा सचिवालय का कड़ा एक्शन, विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी









