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जयपुर: बाड़े के बीच चल रहा सरकारी स्कूल आखिरकार निजी मकान में स्थानांतरित, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

AI image of Rajasthan School
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जयपुर स्कूल विवाद: विरोध और खबरों के बाद बैकफुट पर विभाग, अब निजी परिसर से संचालित होगा विद्यालय
तबेले में पढ़ाई की मजबूरी और प्रशासनिक कार्रवाई
राजस्थान की राजधानी जयपुर के ग्रामीण इलाके में सामने आई एक चौंकाने वाली स्थिति के बाद आखिरकार शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है। हाल ही में यह मामला सुर्खियों में आया था कि एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय का संचालन मजबूरीवश पशुओं के बाड़े (तबेले) के बीच किया जा रहा था, जहाँ बच्चे गंदगी और दुर्गंध के बीच बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे।
घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद जैसे ही जन-आक्रोश बढ़ा, प्रशासनिक तंत्र ने तुरंत संज्ञान लिया और विद्यालय को अस्थाई तौर पर एक पक्के निजी मकान में स्थानांतरित कर दिया।
अस्थाई व्यवस्था से राहत, लेकिन स्थायी समाधान की प्रतीक्षा
स्कूल के नए परिसर में शिफ्ट होने से विद्यार्थियों को बुनियादी स्वच्छता और बैठने की बेहतर सुविधा तो मिल गई है, लेकिन स्थानीय निवासी और अभिभावक इसे केवल एक तात्कालिक कदम मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए जब तक स्कूल को अपने खुद के स्थायी भवन में शिफ्ट नहीं किया जाता, तब तक यह समस्या पूरी तरह से हल नहीं होगी।
अभिभावकों की मांग: ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि नया भवन निर्मित होने तक परिसर में पेयजल, शौचालय और खेल के मैदान जैसी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं।
प्रशासनिक रुख: विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए स्थायी स्कूल भवन के निर्माण और भूमि आवंटन की कागजी प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में विद्यार्थियों को कोई परेशानी न हो।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
राजधानी क्षेत्र में ही शैक्षणिक संस्थानों की ऐसी बदहाली सामने आने पर शिक्षा विशेषज्ञों और नागरिक समाज ने व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि केवल विवाद उठने के बाद अस्थाई कदम उठाना काफी नहीं है, बल्कि राज्य भर में जर्जर और मूलभूत सुविधाओं से वंचित स्कूलों का एक सर्वेक्षण कराकर उन्हें आधुनिक व सुरक्षित परिसर प्रदान किया जाना चाहिए।