अयोध्या / नई दिल्ली:
अयोध्या स्थित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और उसके आंतरिक प्रशासनिक ढाँचे को लेकर एक नया घटनाक्रम सामने आया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक विस्तृत और 9 पन्नों का लिखित वक्तव्य जारी कर मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्रा की कार्यशैली तथा निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर कई गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। कुल 33 मुख्य बिंदुओं में तैयार किए गए इस दस्तावेज ने धार्मिक और प्रशासनिक गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है।
33 बिंदुओं में रखा अपना पक्ष
पूर्व महासचिव द्वारा सार्वजनिक किए गए इस लंबे बयान में वर्ष 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद से लेकर अब तक के तमाम घटनाक्रमों की एक-एक परत खोली गई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह दावा किया है कि मंदिर निर्माण प्रक्रिया से जुड़े सभी बड़े और नीतिगत फैसले अकेले निर्माण समिति के अध्यक्ष के स्तर पर ही लिए गए।
दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि निर्माण कार्य में किस एजेंसी को ठेका दिया जाना है, कौन सी वास्तुकला फर्म इसमें शामिल होगी और सुरक्षा व्यवस्था के क्या मापदंड होंगे, इन सभी मुख्य निर्णयों में निर्माण समिति के शीर्ष नेतृत्व की ही मुख्य भूमिका रही। चंपत राय का कहना है कि कई मौकों पर अन्य सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों को दरकिनार किया गया और केवल एक ही व्यक्ति के दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी गई।
कंपनियों के चयन और समिति के गठन पर दावे
जारी वक्तव्य में बताया गया है कि मंदिर निर्माण के लिए निर्माण एजेंसी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और प्रोजेक्ट कंसल्टेंट के रूप में टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का चयन निर्माण समिति की सिफारिशों के आधार पर ही हुआ था। इसके साथ ही नोएडा की एक निजी डिजाइन फर्म को अन्य इमारतों के काम के लिए चुना गया। पूर्व महासचिव ने यह भी आरोप लगाया है कि समिति में अपनी सुविधानुसार कई लोगों को शामिल किया गया, जिनमें से कुछ प्रतिनिधि पूरी प्रक्रिया के दौरान केवल एक या दो बैठकों में ही उपस्थित हुए।
हालिया विवादों के बीच आया बयान
यह विस्तृत वक्तव्य ऐसे समय में सामने आया है जब हाल के दिनों में मंदिर व्यवस्था और दान-पुण्य के प्रबंधन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। पूर्व में जांच एजेंसियों द्वारा की गई पड़ताल के बाद जब परिस्थितियां स्पष्ट हुईं, तब पूर्व महासचिव ने अपनी ओर से पक्ष रखने का निर्णय लिया।
दूसरी ओर, इस बयान के सार्वजनिक होने के बाद निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंदिर के अंदरूनी हिस्से का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और समय-सीमा के भीतर सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने वित्तीय भुगतानों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी होने की बात भी कही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच के इन वैचारिक मतभेदों का मंदिर के भावी प्रबंधन और प्रशासनिक ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ता है।
राम मंदिर निर्माण प्रबंधन पर उठे सवाल: पूर्व महासचिव चंपत राय ने 9 पन्नों का विस्तृत वक्तव्य किया जारी









