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JPSC और JSSC सुधार की मांग पर अड़े छात्र: 22वें दिन तिरंगा यात्रा के दौरान पुलिस और छात्रों में धक्का-मुक्की, देवेंद्र महतो जख्मी

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रांची, झारखंड:
झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में पारदर्शिता और कड़े सुधारों की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन 22वें दिन भी जारी रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आंदोलनकारी छात्रों द्वारा निकाली जा रही तिरंगा यात्रा के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस बल और छात्रों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हो गई। इस घटना में छात्र संगठन के प्रमुख नेता देवेंद्र नाथ महतो के सीने में चोट आई है, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा रोकने से बिगड़ा माहौल
आंदोलन के 22वें दिन छात्रों ने अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान खींचने के लिए एक शांतिपूर्ण ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन किया था। छात्र तिरंगा फहराने और अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ रहे थे, तभी सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन ने उन्हें बीच रास्ते में रोक लिया।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का आरोप है कि जब वे शांतिपूर्वक आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की और जबरन रोकने की कोशिश की। इस धक्का-मुक्की के दौरान उनके सीने में गंभीर चोट लगी। महतो ने कहा, “हम कोई उपद्रव नहीं कर रहे थे, केवल राष्ट्रीय ध्वज लेकर अपनी मांगों के लिए आवाज उठा रहे थे। तिरंगा यात्रा में इस तरह का अवरोध पैदा करना और छात्रों पर बल प्रयोग करना बेहद दुखद है।”
22 दिनों से सुलग रहा है छात्रों का असंतोष
गौरतलब है कि राज्य के हजारों प्रतियोगी छात्र पिछले तीन हफ्तों से ज्यादा समय से सड़कों पर हैं। उनकी प्रमुख मांगे हैं:
पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया: JPSC और JSSC द्वारा आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं में धांधली और पेपर-लीक को रोकने के लिए सख्त और पारदर्शी कानून बनाए जाएं।
समयबद्ध परिणाम: विभिन्न लंबित भर्तियों के परिणाम तुरंत घोषित किए जाएं और परीक्षा कैलेंडर का कड़ाई से पालन हो।
आयोग में सुधार: चयन आयोगों की कार्यप्रणाली में आमूलचूल बदलाव और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
प्रशासन की सफाई और गरमाती राजनीति
दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए छात्रों को कुछ संवेदनशील इलाकों में जाने से रोका गया था। पुलिस का दावा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल हल्का बल प्रयोग किया गया और किसी भी अनहोनी से बचने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
इस घटना के बाद से ही छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना की गूंज सुनाई देने लगी है। विभिन्न छात्र संगठनों ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है और मांग की है कि सरकार दमनकारी रवैया छोड़कर आंदोलनकारी छात्रों के साथ तुरंत बातचीत का रास्ता निकाले। फिलहाल, रांची में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और छात्रों ने मांगे पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।